पश्चिम बंगाल और उड़ीसा की खींचतान के बाद अब मथुरा से भी दावा, रसगुल्ला की खोज ब्रज से

- समिति का कहना है कि जैसे भगवद्गीता सत्य है, वैसे ही रसगुल्ले यानि खीरमोहन पर है ब्रजभूमि का अधिकार वृन्दावन, HT 17 नवम्बर 2017,(VT) रसगुल्ले के ईजाद को लेकर पश्चिम बंगाल और उड़ीसा की खींचतान के बाद अब मथुरा से भी इस पर दावा जताया गया है। अखिल भारतीय सर्वसमाज संघर्ष समिति ने इसे मूलतः खीरमोहन बताते हुए पेटेंट के लिए राष्ट्रपति को पत्र … [आगे पढ़ें...]

जगद्गुरू कृपालु परिषत् ने कराया विधवा माता भोज, 4000 विधवा माताओं ने किया भोज

- प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है यह आयोजन वृन्दावन, 12 नवम्बर 2017,(VT) जगद्गुरू कृपालु परिषत् प्रतिवर्ष मनाये जाने वाला भोज इस बार भी मनाया गया, शुक्रवार को परिषत् द्वारा विधवा भोज का आयोजन किया गया जिसमें प्रेम मंदिर में आयोजित विधवा भोज में चार हजार निराश्रित विधवाओं को भोजन करवाकर परिषत ने दैनिक उपयोग की वस्तुएं भेंट एवं नकद भेंट … [आगे पढ़ें...]

आज सिद्ध बाबा श्रील प्राणकृष्णदास जी के तिरोभाव महोत्सव पर विशेष :::

Vrindavan, 09 Nov. 2017, (VT) श्रीकृष्ण कथा रस में निरंतर निमज्जन करने वाले श्री प्राणकृष्णदास बाबा का जन्म सन 1802 में पश्चिम बंगाल में वर्धमान जिले के कालना के निकट बागानपाड़ा में हुआ। श्री जाह्ववा माता की परम्परा में श्री नित्यानंद परिवार के बागानपाड़ा के श्री यदुनंदन गोस्वामी जी महाराज से इन्होंने दीक्षा ग्रहण की। युवावस्था में वैराग्य … [आगे पढ़ें...]

गोपाष्टमी विशेष : आगयैं आगयैं गईया, पाछैं पाछैं ग्वाल, माखन खईवैं मेरौ मदन गोपाल…

’गोपाष्टमी विशेष आलेखः’ ’साभार :  श्रीसुनील गौतम ब्रजवासी जी’ सात दिन में नौ त्योहार यही है ब्रज की असली पहचान वृन्दावन, 27 अक्टूबर 2017, (VT) सात दिन नौ त्योहार यह है ब्रज की कहाबत यानी कि सात दिन होने पर भी ब्रजवासियो के यहाँ नौ त्योहर होते है। इन्ही त्योहारों में प्रमुख है, गोपाष्टमी। गोपाष्टमी ब्रज संस्कृति का एक प्रमुख पर्व … [आगे पढ़ें...]

श्रीकृष्ण की लीलास्थली वृन्दावन और बरसाना को मिला तीर्थस्थल का दर्जा

-ठीक जैसे वृन्दावन को अलग तीर्थस्थल बनाया गया हैं, ठीक वैसे ही मथुरा—वृन्दावन नगर निगम में से वृन्दावन को पृथक कर अलग नगरपालिका या नगर निगम बनाया जाए। -वृन्दावन का अपना अलग महत्व और मथुरा का अपना अलग महत्व - दोनों नगरों की संस्कृति न की जाए एक वृन्दावन, 27 अक्टूबर 2017,(VT) करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था का केंद्र भगवान श्रीकृष्ण की … [आगे पढ़ें...]

नहीं रूके अवैध निर्माण, तो भर—भराकर गिर सकती है ऐतिहासिक धरोहर गोविन्ददेव मंदिर

 -गौमा टीले के लगातार अवैध खनन व आसपास के लोगों द्वारा अपने मकानों में बेसमेंट (तल घर) बनवाने के कारण मंदिर के धंसने के आसार  -पिछले लगभग 10 वर्षों से गोविदंदेव मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल करने को कर रहे हैं लगातार पत्राचार  -स्थानीय निवासियों की बदनीयती एवं अधिकारियों के निकम्मेपन, भ्रष्टाचार के कारण नष्ट हो रही है धरोहर  -नहीं … [आगे पढ़ें...]

रामानुज सम्प्रदाय के सिद्धांत की विशिष्टता है कि भक्ति और ज्ञान

- ब्रज संस्कृति शोध संस्थान द्वारा प्रासंगिक विषयों पर आयोजित किया गया व्याख्यान वृन्दावन, 05 अक्टूबर 2017,(VT) ब्रज संस्कृति शोध संस्थान में मंगलवार को श्रीमद् रामानुजाचार्य के सिद्धांत की तत्कालीन एवं समसामयिक परिदृश्य में प्रासंगिकता विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की शोध अध्येता डॉ. मीनाक्षी जोशी ने कहा … [आगे पढ़ें...]

विरक्त संत रमेश बाबा की 40 दिवसीय ब्रजयात्रा प्रारम्भ

- ब्रजयात्रा के दौरान यमुना शुद्धिकरण की होगी बुलंद आवाज - पिछले 30 वर्षों बाबा द्वारा आयोजित की जाती है विशाल ब्रजयात्रा - ब्रजयात्रा के दौरान देश-विदेश से ब्रजयात्रा करने आते है श्रद्धालु एवं भक्त वृन्दावन, (बरसाना) 05 अक्टूबर 2017,(VT) बृषभान नंदनी के धाम से शुरू हुई ब्रज चैरासी कोस की 40 दिवसीय राधारानी मंगलवार को ब्रज के विरक्त … [आगे पढ़ें...]

श्रीश्रीमन्माध्वाचार्य जी के आविर्भाव महोत्सव पर विशेष:

वृन्दावन, 01 अक्टूबर 2017,(VT) श्रीमन्माध्वाचार्य जी का जन्म उडिपी से तीन मील दूर उत्तरी कन्नड़ में सन १२३८ में विजयदशमी के दिन हुआ। केवल ५ वर्ष की आयु में ही उन्होंने दीक्षा ग्रहण की एवं १२ वर्ष की आयु में सन्यास लेकर मोह के बंधनों से मुक्त होकर भक्ति पथ की ओर अग्रसर हुए। आपके पिताजी का नाम श्रीमध्वगेह भट्ट, व माताजी का नाम श्रीमती … [आगे पढ़ें...]

एक समय वृन्दावन की हरियाली और घाटों की रमणीक श्रृंखला को देखकर रीझते थे ​देशी—विदेश पर्यटक

-मलबे में पटी है वृन्दावन की अद्भुत धरोहर, कितनी बड़ी कीमत चुकाई है वृन्दावन ने {द्वारा: ब्रज संस्कृति शोध संस्थान, वृन्दावन}   (VT) 30 Sep 2017, वृन्दावन में मन्दिरों के बाद सब से बड़े आकर्षण के केन्द्र थे यहाँ के कलात्मक घाट ! जिन्हें 18 वीं सदी में अत्यन्त भक्ति भाव से यमुना के तट पर निर्मित कराया था ,राजपूत ,जाट, मराठा , … [आगे पढ़ें...]