यमुना प्रदूषण मामले में पीछा नहीं छोड़ रही गलत बयानी और लापरवाही

– सहायक नगर आयुक्त डा. ब्रजेश कुमार को हाईकोर्ट द्वारा किया गया था निलंबित
– हाईकोर्ट ने गलत जानकारी देने के दोषी कर्मचारियों अधिकारियों के दिए थे कार्रवाई के आदेश
वृन्दावन, 03 जनवरी 2018,(VT) यमुना प्रदूषण मामले पर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई में गलतबयानी और लापरवाही अभी भी नगर निगम अधिकारियों के लिए गले की फांस बन सकती है। हाईकोर्ट ने गलत जानकारी देने के दोषी कर्मचारियों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश किए हैं। निगम ने इसका अनुपालन किया है अथवा नहीं, इस बारे में आरटीआइ के जरिए जानकारी मांगी गयी है।
याची मधु मंगल शुक्ला ने नगर आयुक्त से दस बिंदुओं पर जानकारी देने की अपेक्षा की है। ये वे बिन्दु हैं, जिन पर बिना कार्रवाई किए आरटीआइ में जवाब देना अधिकारियों के लिए जोखिम भरा भी हो सकता है और वास्तविकता यही है कि जिस तरह से हलफनामा तैयार किया गया, उसमें कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक भारी लापरवाही बरती गयी।
नगर निगम द्वारा दाखिल शपथ पत्र के तथ्य अपर जिला जज की रिपोर्ट के विपरीत पाए गए, लेकिन नगर निगम ने शपथ पूर्वक कहा कि सभी जानकारियां आफिशियल कन्सर्न के द्वारा मुहैया कराई गयी। बाद में निगम ने तीन जेई, दो वाद लिपिक एवं एक लिपिक से स्पष्टीकरण मांगा। इन कर्मचारियों द्वारा लगाए गए जवाब की छायाप्रति याची ने मांगी है।
आरटीआइ में वाद लिपिकों की योग्यता संबंधी अभिलेख, सूचनाएं और इस पद के लिए क्या योग्यता है, यह जानकारी भी मांगी गयी है। गलत जानकारी पाए जाने पर इनके खिलाफ क्या कार्रवाई निगम प्रशासन ने की है, यह भी पूछा गया है। निगम में विधि अधिकारी है अथवा नहीं और यदि नहीं है तो क्या शासन को अवगत कराया गया है, यह सूचना भी मांगी गयी है। इस मामले में दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं और दो पैनल अधिवक्ताओं को ढाई लाख रुपये की धनराशि फीस के रूप में दी गयी, निगम निधि से व्यय हुई इस राशि की भरपाई कैसे की जाएगी, यह भी पूछ लिया गया है।
इसी तरह जिन पैनल अधिवक्ताओं द्वारा बिना जांच पड़ताल किए और अपर जिला जज की रिपोर्ट के विरुद्ध रिपोर्ट दी गयी, उन्हें दोषी मानते हुए निगम प्रशासन ने उन्हें पैनल से हटाया है अथवा नहीं, यह पूछ लिया गया है। 12 मई 2017 को नगर निगम बनने के बाद से निगम प्रशासन ने अपने अधिवक्ताओं पर फीस के रूप में कितनी धनराशि व्यय की है, यह जानकारी भी नगर आयुक्त से मांगी गयी है। सूत्रों का कहना है कि निगम अगर सही जानकारी देता है तो वह फिर मुसीबत में फंस जाएगा और नहीं देता है तो भी उसकी मुसीबत है। DKS

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