तमाम आदेशों के दरकिनार यमुना में जा रहा रासायनिक एवं बायो कचरा

– मसानी से लेकर विश्रम घाट तक रोज बन रह है सफेद रंग का झाग  
-लापरवाही बरत रहे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम
वृन्दावन, 12 जनवरी 2017, (VT) यमुना के जलचरों के जीवन और श्रद्धालुओं की भावनाओं पर दोहरी मार पड़ना शुरू हो गई है। एक ओर कोहरे के कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया मद्धिम पड़ गई है, जिसकी वजह से भारी प्रदूषण के बीच यमुना के जलचर तड़पने लगे हैं तो दूसरी ओर यमुना में रासायनिक और बायो कचरा बड़ी मात्रा में प्रवाहित हो रहा है, जिससे यमुना की सतह पर सुबह के समय झाग तैर रहा है और सीढ़ियों पर भारी गाद जमा हो गई है।
सर्दी का मौसम आते ही यमुना का पानी बेहद कमजोर हो गया है। मसानी नाले से रासायनिक और बायो कचरा बड़ी मात्र में यमुना में आने लगा है। इसकी बानगी सुबह के समय मसानी नाले के मुहाने पर देखी जा सकती है, जहां बड़ी मात्र में फैन इकट्ठा हो रहा है। सफेद रंग का झाग मसानी से लेकर कंस टीला और गऊ घाट से होते हुए विश्रम घाट तक आ रहा है। इसी तरह विश्रम घाट पर दो सीढ़ी उतरते ही भारी गाद जमा हो गई है, जिससे स्नान के लिए उतरने वाले श्रद्धालु फिसल रहे हैं।
इस समय मथुरा नगर में बड़ी संख्या में अप्रवासी गुजराती आ रहे हैं, जो यमुना जल की दुर्दशा से बेहद आहत हैं। बढ़े प्रदूषण की वजह से पानी की स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि जलचर तड़पने लगे हैं। पानी में अब सूर्य की कम ऊर्जा मिलने के कारण प्रदूषण से प्राकृतिक रूप से उबरने की क्षमता नहीं रही है और स्थानीय पुरोहितों की मानें तो किसी भी दिन बड़ी संख्या में मछलियों के मारे जाने की घटना सामने आ सकती है।
एनजीटी में प्रदूषणकारी उद्योगों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे पुरोहित कांतानाथ चतुर्वेदी का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इकाइयों के सैंपल लेने में घोर लापरवाही बरत रहा है और नगर निगम प्रशासन एसटीपी संचालन पर कतई ध्यान नहीं दे रहा। हाईकोर्ट की सख्त कार्रवाई के बाद भी नगर निगम और जिला प्रशासन ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। DKS

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