गुजरात की तरह मथुरा में भी नहरों पर लगेंगे कैनाल टॉप सोलर सिस्टम

– सबसे पहले इसका प्रयोग गोवर्धन ड्रेन पर किया जाएगा, लगभग 5 मेगावाट कैनाल टॉप सोलर सिस्टम से प्रकाशमय होगी गिरिराज तलहटी एवं बाईपास
– गुजरात के बड़ौदा शहर में लगे प्रयोग को आजमाएगा प्रशासन
– नहरों की पटरियां भी होंगी सुरक्षित, दुर्घटनाएं भी नहीं होगी एवं नहरों का पानी भी रहेगा सुरक्षित
वृन्दावन, गोवर्धन 13 जनवरी 2018, (VT) गुजरात में नहरों की पटरियों, दुर्घटनाओं को सुरक्षित करने के लिए वहां उन पर सोलर प्लांट लगवाए गए हैं, जिससे कि नहरों की पटरियां भी सुरक्षित रहेंगी और दुर्घटनाएं भी होने से बचेंगी और नहरों को पानी भी गन्दा नहीं होगा।
अब प्रशासन भी गुजरात की सौर ऊर्जा के सदुपयोग के साथ-साथ जल संसाधनों को गंदा होने और वाष्पीकरण से बचाने, नहरों की पटरियों को सुरक्षित रखने, निष्प्रयोज्य जगह के सदुपयोग और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जनपद में कैनाल टॉप सोलर पैनल लगाए जाएंगे।
गुजरात के पैटर्न पर स्थापित होने वाले सोलर प्रोजेक्ट के लिए गोवर्धन ड्रेन का चयन किया गया है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सचिव नागेंद्र प्रताप, उज्जवल ब्रज संस्था के सचिव अनंत शर्मा, आर्किटेक्ट मयंक गर्ग और समर्थ चतुर्वेदी ने बड़ौदा (गुजरात) में कैनाल टॉप सोलर प्रोजेक्ट का मुआयना कर लौटे हैं। वहां नर्मदा नदी से निकली नहरों पर कैनाल टॉप सोलर सिस्टम लगाया गया है।
उसके गुण-दोषों का अध्ययन करने के बाद मथुरा में लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इससे एक ओर नहरों के पानी के वाष्पीकृत होने से रोका जा सकेगा तो दूसरी ओर पानी भी ढके होने के कारण गंदा नहीं होगा। नहर की पटरियां सुरक्षित रहेंगी, बल्कि निष्प्रयोज्य जगह का सदुपयोग भी हो सकेगा। इससे पानी में कूदकर आत्महत्या या पैर फिसलने के कारण डूबकर असमय मृत्यु की घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा।
गोवर्धन ड्रेन पर इसका सबसे पहले प्रयोग होगा। कैनाल टॉप सोलर सिस्टम पीपीपी मॉडल के आधार पर स्थापित होगा।

गोवर्धन ड्रेन पर पर अनुमानत: 5 मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट लगाया जाएगा, जिससे गोवर्धन परिक्रमा और बाईपास की सारी एलईडी आदि की विद्युत सप्लाई कराई जाएगी। गोवर्धन ड्रेन में दरअसल इस समय पानी भी बहुत कम है। जो पानी है, वह भी गंदा ही है। इस ड्रेन के दोनों ओर बाईपास बन चुका है।
एक सप्ताह के अंदर होगा सर्वे कैनाल टॉप सोलर के लिए एक सप्ताह के अंदर सर्वे शुरू होगा। यह सर्वे हैदराबाद की एक एजेंसी करेगी, जिसके बाद इसकी डीपीआर बनाई जाएगी।  DKS

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