गिरिराज पर्वत के संरक्षण और सुरक्षा को लेकर श्राइन बोर्ड का गठन

– एनजीटी के आदेशों के अनुपालन राज्य सरकार ने लिया महत्वपूर्ण फैसला  
– राज्य सरकार ने दानघाटी मंदिर, मुखारबिंद मंदिर मानसी गंगा और मुखारबिंद मंदिर जतीपुरा का किया अधिग्रहण
– श्राइन बोर्ड को मंदिरों से 24 करोड़ रूपये की सलाना आय
वृन्दावन, 10 जनवरी 2017, (VT) एनजीटी के लगातार आदेशों के बावजूद राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गोवर्धन पर्वत के संरक्षणार्थ श्राइन बोर्ड का गठन कर दिया है। यह फैसला नेशनल ग्रीन टिब्युनल के निर्देशों के अनुपालन में किया गया है। एनजीटी ने गिरिराज के परिक्रमा क्षेत्र को नो कन्स्टक्शन जोन घोषित करने का फैसला दिया है।
गोवर्धन पर्वत के मूल स्वरूप में प्रभाव होने पर नाराज एनजीटी के आदेश के अनुपालन राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। गोवर्धन की सप्त कोसीय परिक्रमा की जमीनी हकीकत जानने के लिए एनजीटी ने विशेषज्ञों को भेजकर वहां की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दे दिए है।
श्राइन बोर्ड का गठन कर गोवर्धन के तीन मंदिरों को अधिग्रहीत ग्रहण कर लिया गया हैं, जिससे श्राइन बोर्ड को करीब 24 करोड़ रुपये की सालाना आय होगी, इस प्राप्त धनराशि से गोवर्धन का सर्वांगीण विकास हो जाएगा। श्राइन बोर्ड के गठन की रूपरेखा ब्रज तीर्थ विकास परिषद तैयार कर रही है। राज्य सरकार ने गोवर्धन के दानघाटी मंदिर, मुकुट मुखारबिंद मंदिर मानसी गंगा और मुकुट मुखारबिंद मंदिर जतीपुरा को अधिग्रहीत करने का फैसला लिया है। इसके लिए श्राइन बोर्ड का गठन किया जाएगा।
ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप ने बताया कि श्राइन बोर्ड का गठन स्थानीय योजनाओं पर अमल एवं पौराणिकता एवं प्राचीनता का संरक्षण करना है। परिक्रमा मार्ग से विलुप्त प्रजातियों के पौधे जैसे धौ, तमाल और करील के साथ पीपल बरगद पाखर, कदंब के पौधे रोपे जाएंगे। श्राइन बोर्ड के गठन से क्षेत्रीय जनता को काफी उम्मीदें हैं।

विकास के लिए नहीं रहेगी धन की कमी :
श्राइन बोर्ड का गठन होने के बाद गोवर्धन के विकास के लिए धन की कमी नहीं रहेगी। जनता का मानना है कि बिजली, पेयजल और सफाई जैसी समस्याओं से उसे छुटकारा मिल जाएगा। परिक्रमा में ट्राम चलाए जाने की योजना पर पहले से ही विचार किया जा रहा है। इसमें पटरी या फिर टायर पर चलने वाली ट्रेन पर मंथन किया जा रहा है। ऐतिहासिक स्थलों पर ट्रेन के स्टॉप बनाए जाएंगे। डिसप्ले बोर्ड पर लीला स्थली से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी।
यहां हरियाली लाने के प्रोजेक्ट पर पूसा इंस्टीट्यूट दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ प्रभात कुमार और आरबीएस कॉलेज आगरा की वैज्ञानिक सीमा बडोरिया कार्य कर रही हैं। मंदिरों पर चढ़ रहा दूध नालियों में बहकर सड़ रहा है। इसकी दुर्गंध यहां के लिए नासूर बन चुकी है। इसके समाधान को प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। भंडारा स्थल और जनसुविधा केंद्र पहले से मौजूद है। उनकी संख्या में बढ़ोतरी हो जाएगी।
सुरक्षा के लिहाज से परिक्रमा मार्ग में सीसीटीवी लगाए जाएंगे। बंदर ओर गोवंश के लिए खान-पान की सामग्री डालने के स्थल निर्धारित होंगे। गोवर्धन को जयपुर हाईवे से जोड़ा जाएगा। परिक्रमा मार्ग में नियमित भजन कीर्तन होगा। DKS

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