हजारों भक्तों के साथ डोले में विराजमान होकर वैकुण्ठ द्वार पहुंचे रंगनाथ भगवान

– मान्यता है कि बैकुंठ द्वार से जो प्राणी गुजरता है, उसे होती है बैकुंठ की प्राप्ति  
वृन्दावन, 29 दिसम्बर 2017,(VT) उत्तर भारत का विशाल मंदिर श्री रंगनाथ मंदिर में दक्षिण भारतीय परम्परानुसार वैकुण्ठ उत्सव मनाया गया, जिसमें श्रीगोदारंगमन्नार भगवान डोले में विराजमान होकर बैकुंठ द्वार पहुंचे, हजारों भक्तों के साथ वैकुण्ठ द्वार पहुंचे भगवानश्रीगोदारंगमन्नाथ जी का भव्य आरती एवं दक्षिण भारतीय पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की गई। मान्यता है कि इस बैकुंठ द्वार से जो प्राणी गुजरता है, उसे बैकुंठ की प्राप्ति होती है।
जानकारी देते हुए रामानुजाचार्य संप्रदाय के आचार्य नरेशनारायण ने बताया कि करीब साढ़े चार सौ साल पहले तमिलनाडु के आल्वार तिरु नगरी में इमली के वृक्ष के नीचे भगवान की साधना में रत रहने वाले संत आल्वार शठकोप सूरी महाराज का जब बैकुंठ जाने का समय हुआ तो उन्होंने बैकुंठ गमन से पहले भगवान से उनके द्वारा रची गई श्रीराम एवं श्रीकृष्ण लीलाओं का वर्णन सुनाने की अपील की।
संत की प्रार्थना से प्रसन्न भगवान रंगनाथ ने उन्हें बैकुंठ जाने के लिए दस दिन का समय बढ़ा दिया और उनके समक्ष अपने दोनों रूपों की अपनी लीलाओं का वर्णन किया। इसके बाद ही संत आल्वार शठकोप सूरी महाराज बैकुंठ गए। इसी समय से रामानुज संप्रदाय में बैकुंठ उत्सव के अनुसार मनाया जाता है।
देर रात से ही जुटने लगेे थे भक्त: ठा. रंगनाथ महाराज की सवारी के दर्शन कर बैकुंठ द्वार से गुजरने की इच्छा लेकर देश के कोने-कोने से आकर श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर के बाहर एकत्रित होना शुरू हो जाते हैं। मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बल्लियों से रेलिंग करके व्यवस्थाएं संचालित करता है। ताकि हर श्रद्धालु को बैकुंठ द्वारा से गुजरने का मौका मिल सके और आराध्य का दर्शन लाभ भी मिल सके। DKS

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