सम्पूर्ण भारत में कृष्ण-भक्ति के प्रचार हेतु गौड़ीय मठ का गठन किया था भक्तिसिद्धान्त सरस्वती महाराज ने

– आज श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर जी की तिरोभाव तिथि पर विशेष ::

Vrindavan, 08 Dec 2017 (VT) श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर (१८७४ – १९३७) भारत में १९वीं और प्रारंभिक २०वीं सदी में गौड़ीय वैष्णव सिद्धांत के प्रचारक रहे । बिमल प्रसाद दत्त के नाम से उनका जन्म उड़ीसा के जगन्नाथ पूरी धाम में हुआ । वैष्णव शास्त्रों में विद्वान श्रील भक्तिविनोद ठाकुर उनके पिता थे जिन्होंने भगवान चैतन्य के द्वारा प्रतिपादित वैष्णव शिक्षा को अंग्रेजी भाषी समुदाय में सर्वप्रथम प्रचारित किया ।

सन १९१८ में सिद्धांत सरस्वती ने आध्यात्मिक जीवन में संन्यास दीक्षा ग्रहण की जिसके पश्चात उनको श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी महाराज की उपाधि से सम्मानित किया गया । सम्पूर्ण भारत में कृष्ण-भक्ति के प्रचार हेतु उन्होंने गौड़ीय मठ का गठन किया और भारत में ६४ केन्द्रों द्वारा इसका प्रसार किया । उनके इस मिशन का मुख्यालय श्री चैतन्य महाप्रभु के जन्मस्थान श्रीधाम मायापुर में चैतन्य गौड़ीय-मठ के नाम से विख्यात है ।

श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर विश्व विख्यात अध्यात्मिक प्रचारक श्रील भक्तिवेदांत स्वामी के गुरु हैं । श्रील भक्तिवेदांत स्वामी, ६९ वर्ष की आयु में अपने गुरु की आज्ञा पालन करने के लिए अमेरिका गए और मात्र १२ वर्षो की अल्पावधि में सम्पूर्ण विश्व में १०८ केन्द्रों की स्थापना की और “हरे कृष्ण” नाम को घर-घर तक पहुँचाया । उन्होंने श्रीमदभगवद्गीता एवं श्रीमद भागवतम् के श्लोकों की प्रामाणिक अंग्रेजी अनुवाद एवं टीका प्रस्तुत किया जिससे हज़ारों लोगों को अमूल्य वैदिक एवं पौराणिक शिक्षाओं का लाभ मिला । DKS

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