नमामि गंगे परियोजना में मथुरा नगर के सबसे बड़े एसटीपी का वैश्विक टेंडर

– केंद्र सरकार ने इसका कराया वैश्विक टेंडर एवं प्रारूप विश्व बैंक की सिस्टर कंसर्न इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन ने किया है तैयार
– 204 करोड़ की लागत से बनने वाला यह एसटीपी 30 एमएलडी जलीय कचरे का करेगा शोधन
वृन्दावन, 25 दिसम्बर 2017,(VT) नमामि गंगे में मथुरा नगर के लिए प्रस्तावित सबसे बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए कोई अंतराष्ट्रीय कंपनी भी सामने आ सकती है। केंद्र सरकार ने इसका वैश्विक टेंडर कराया है और इसका प्रारूप विश्व बैंक की सिस्टर कंसर्न इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन ने तैयार किया है। 204 करोड़ की लागत से बनने वाला यह एसटीपी 30 एमएलडी जलीय कचरे का शोधन किया करेगा।
केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना में मथुरा-वृंदावन और गोकुल की यमुना को शामिल किया गया है। तीन साल पहले शुरू हुई नमामि गंगे के काम अब मथुरा में होने जा रहे हैं। इसकी शुरूआत जनवरी के अंतिम सप्ताह अथवा फरवरी से हो सकती है। परियोजना के तहत वृंदावन में कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड तकनीक का एसटीपी तो स्वीकृत हुआ ही है, मथुरा नगर के लिए अब तक का सबसे बड़ा एसटीपी भी स्वीकृत हो गया है।
यह एसटीपी पीएमवी पालीटैक्निक के पीछे बने पुराने एसटीपी के समीप ही बनाया जाएगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए 204 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है और यह 30 एमएलडी जलीय कचरे का शोधन किया करेगा। इस प्रोजेक्ट की महत्ता इसी से समझी जा सकती है कि एसटीपी की वैश्विक निविदा निकाली गई है। इसका निविदा प्रारूप विश्व बैंक की सिस्टर कंसर्न इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन के माध्यम से तैयार कराया गया है।
जल संसाधन मंत्रलय के नई दिल्ली स्थित कार्यालय में हुई बैठक से भाग लेकर लौटे जल निगम की सीवरेज एंड ड्रेनेज इकाई के सहायक अभियंता वसीम अतहर हुसैन ने बताया कि प्रोजेक्ट का टेंडर होने जा रहा है। एसटीपी बनाने वाली एजेंसी को वर्तमान में स्थापित समस्त एसटीपी और एसपीएस का टेंडर होने के साथ ही पुनरोद्धार भी करना है। सभी की क्षमताएं बढ़ेंगी और पंप आदि सभी दुरुस्त होंगे। नया एसटीपी दो साल में बनकर तैयार होगा और एजेंसी इसका पंद्रह साल के लिए रखरखाव व संचालन करेगी।
मेयर डॉ. मुकेश आर्यबंधु ने बताया है कि अनुबंध में यह शर्त भी रखी गयी है कि राल ड्रेन का ओवरफ्लो होने वाला पानी हो अथवा लगातार बढ़ रहा इंडस्ट्रियल कचरा, सभी शोधित करना होगा और यमुना में जरा सा भी जलीय कचरा जाने पर उसे जुर्माना देना होगा। उन्हें उम्मीद है कि नए साल से स्थानीय स्तर पर यमुना प्रदूषण में भारी कमी आएगी। DKS

एक उत्तर दें छोड़ दो

Your email address will not be published. Required fields are marked *