151 साल की पालिका ने सबको दिए समान अवसर

– सबसे पहले अध्यक्ष एफ. डब्ल्यू. बेयन्स एक्वायर आइसीएस ने करीब 51 साल  व दूसरे मगन लाल शर्मा ने सर्वाधिक 16 साल नगर पालिका में चेयरमैन पद पर कार्यभार संभाला

-अंग्रेजी हकूमत में गठित हुई नगर पालिका, अब हो चुकी है नगर निगम में शामिल, 63,117 हजार हैं मतदाता
वृन्दावन, 20 नवम्बर DJ 2017(VT) जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित नगर पालिका परिषद वृंदावन अब मथुरा-वृंदावन नगर निगम में शामिल है। 63,117 हजार मतदाताओं वाली पालिका परिषद में कांग्रेस व जनसंघ का प्रतिनिधित्व करीब-करीब बराबर ही रहा है। कांग्रेस की ओर से प्रो. कृष्णचंद्र ने करीब 19 साल नगर पालिका में अध्यक्ष पद पर रहकर कार्य किया। इसके बाद वे सांसद भी चुने गए। जनसंघ की ओर से मगन लाल शर्मा ने करीब 16 साल नगर पालिका में चेयरमैन पद पर रहते हुए कार्य किए।
151 साल पुरानी वृंदावन पालिका का गौरवशाली आज भी लोगों की जुबां पर है। अंग्रेजी हकूमत में गठित हुई नगर पालिका से सबसे पहले अध्यक्ष एफ. डब्ल्यू. बेयन्स एक्वायर आइसीएस ने करीब 51 साल कार्यभार संभाला। 1917 में छबीले लाल गोस्वामी ने पालिकाध्यक्ष पद संभाला। इनके बाद कांग्रेसी विचारधारा के बाबू नारायण दास बीए, लक्ष्मी नारायण, बाबू श्रीराम गुप्ता, यमुना प्रसाद और इनके बाद 1931 से 1942 फिर 1945 से 1946 के अलावा 1946 से 1953 तक कांग्रेस के प्रो. कृष्ण चंद्र पालिकाध्यक्ष पद पर काबिज रहे। इसके बाद वे सांसद चुन लिए गए। इस बीच दो महीने के लिए छोटे लाल गौतम ने पालिकाध्यक्ष का पदभार संभाला।
प्रोफेसर के बाद जनसंघ ने पालिका पर अपनी पताका फहराई और विशंभर गोस्वामी ने कांग्रेस को मात देकर पालिकाध्यक्ष पद कब्जा किया। इनके बाद जनसंघ से ही हर स्वरूप पाठक और प्रो. कृष्णचंद्र के बाद सबसे अधिक समय तक चेयरमैन रहे मगन लाल शर्मा ने पालिका में शासन किया। उनका पहला कार्यकाल खत्म हुआ तो कांग्रेस के वृंदावन दास बजाज, रामहीलाल गहलौत, गोविंद लाल देव गोस्वामी थोड़े-थोड़े समय के लिए पालिकाध्यक्ष रहे। एक बार फिर मगनलाल शर्मा ने पालिकाध्यक्ष की सीट कब्जाई और 1964 से लेकर 1971 तक काबिज रहे।
इनके बाद एक-एक साल के लिए निर्दलीय रमेश चंद्र शर्मा एडवोकेट व कांग्रेस के ब्रजबिहारी शर्मा पालिकाध्यक्ष रहे। तीन साल कांग्रेस के बैजनाथ बागवाला पालिकाध्यक्ष पद पर कार्यरत रहे। पालिका के कार्यकाल में करीब 12 साल सुपरसीट रही। 1988 में निर्दलीय उम्मीदवार रविंद्र शर्मा एडवोकेट पालिकाध्यक्ष चुने गए, उनके विश्वास मत हारने के बाद भाजपा के गो¨वद शरण अग्रवाल ने 1995 तक कार्यकाल पूरा किया।
इनके बाद भाजपा के पालिकाध्यक्ष लक्ष्मी नारायण पाठक और निर्दलीय के रूप में जगदीश प्रसाद शर्मा ने पालिका में शासन किया। 2006 में निर्दलीय के रूप में पालिकाध्यक्ष पद पर काबिज हुई पुष्पा शर्मा ने बाद में बसपा का दामन थाम लिया और 2012 में भाजपा की ओर से मुकेश गौतम ने पांच साल तक परचम लहराया। DKS

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