हाईकोर्ट के बाद अब एनजीटी में भी फंसा पेच, दायर हलफनामे मिले गलत

– दोनों उच्च अदालतों द्वारा अधिकारियों पर हो सकती है कड़ी कार्यवाही

– 6 नवम्बर को होनी है हाईकोर्ट में सुनवाई
– नगर विकास सचिव ने किया एसटीपी का निरीक्षण
वृन्दावन, 03 नवम्बर 2017,(VT) यमुना प्रदूषण पर हाईकोर्ट में पेच फंस गया है और अब एनजीटी में भी फंस सकता है। नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन से दोनों ही उच्च अदालतों ने हलफनामे मांगे और तीनों ने उक्त दोनों जगह ही विरोधाभासी हलफनामा दाखिल किए हैं। एनजीटी में तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम का दावा भी विरोधाभासी है। नगर निगम प्रशासन एसटीपी संचालन में हीला-हवाली को उसकी कम क्षमता की आड़ में छिपाने की कोशिश कर रहा है।
यमुना प्रदूषण पर हाईकोर्ट में तीन और एनजीटी में भी इतनी ही याचिकाएं लंबित हैं। हाईकोर्ट में फिलहाल वृंदावन के समाजसेवी मधु मंगल शुक्ला की याचिका पर लगातार सुनवाई हो रही है। हाईकोर्ट द्वारा प्रदूषण की वस्तु स्थिति पूछे जाने पर जिलाधिकारी की ओर से दाखिल हलफनामा में प्रदूषण नियंत्रण में बताया गया है, जबकि नगर निगम ने एसटीपी की कम क्षमता का बहाना बनाया है।
गजब बात यह है कि दोनों ही उच्च अदालतों में जवाब दायर करने से पहले जिला प्रशासन ने अपने अधीन काम करने वाले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम से सलाह नहीं की। सवाल यह भी है कि जिलाधिकारी की ओर से जवाब इन दोनों विभागों ने नहीं, तो आखिर किस विभाग ने तैयार किया। नगर निगम का दावा है कि एसटीपी विस्तार का प्रस्ताव शासन में लंबित है। हकीकत यह है कि करीब ढाई साल पहले नमामि गंगे में एसटीपी विस्तार का प्रस्ताव तैयार हुआ और तत्कालीन सपा सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भिजवा दिया।
अब इस प्रकार का कोई प्रस्ताव शासन में नहीं है और नमामि गंगे में जल संसाधन मंत्रलय में उक्त प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा। इसके विपरीत मथुरा और वृंदावन में स्थापित सभी एसटीपी पूरी क्षमता से नहीं चलाए जा रहे। एक तो ठेका संचालन में ही निगम अधिकारी दुरभिसंधि किए हुए हैं, जिसकी शिकायतें शासन से लेकर एनजीटी में भी हो चुकी है। दूसरा, एसटीपी इस लायक भी नहीं हैं, कि पूरी क्षमता से चलाए जा सकें। एनजीटी में दायर सिटीजन वेलफेयर सोसायटी की याचिका में भी नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारी लपेटे में आ सकते हैं।

 

सिटीजन वेलफेयर सोसायटी के सचिव राजीव कुमार सिंह कहते हैं कि अब सुनवाई 12 दिसंबर को होगी। एनजीटी ने भी नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हलफनामे का संज्ञान लिया है। दोनों विभाग अदालतों को भी गुमराह करने में लगे हुए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गलत हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही के आदेश दिए हैं और रिपोर्ट 6 नवंबर को पेश करने को कहा है। माना जा रहा है कि इस मामले में जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी फंस सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक निगम प्रशासन के अधिकारी अपना दामन बचाने के लिए अधीनस्थों को आरोपित करते हुए कृत कार्यवाही की रिपोर्ट भेज सकते हैं। शासन ने सख्ती की तो सहायक नगर आयुक्त, नगर आयुक्त और जिलाधिकारी के लिए भी मुश्किल हो सकती है।
प्रदेश के नगर विकास सचिव ने किया पागलबाबा एसटीपी का दौरा
वृन्दावन। प्रदेश के नगर विकास सचिव मनोज कुमार सिंह ने गुरुवार शाम पागल बाबा मंदिर के पास नवनिर्मिंत आठ एमएलडी के एसटीपी का निरीक्षण किया। उन्होंने अफसरों से इसके संचालन के बारे में जानकारी ली। इसके बाद मुखर्जी पार्क से पागल बाबा एसटीपी तक जा रही पाइप लाइन की जांच करने वे अटल्ला चुंगी पहुंचे। यहां अफसरों की गैरमौजूदगी के कारण वे मथुरा के लिए रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि वे अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद ही बातचीत कर सकेंगे। DKS

 

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