हाईकोर्ट के तमाम आदेशों के बावजूद भी कब्जे को पूरी तरह नहीं हटा पाया प्रशासन

– जयगुरूदेव मामले में हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी यूपीएसआइडीसी ने ऐसी राह छोड़ दी हैं, जिसका लाभ कब्जाधारियों को मिलेगा
– भ्रष्ट कार्यशैली व रिश्वतखोरी में डूबे रहने की लत के कारण प्रशासनिक अधिकारी नहीं करा पा रहे हैं आदेशों का अनुपालन
– यूपीएसआइडीसी के प्लाट 30 पर अभी भी है राजस्व रिकार्ड से कम भूमि प्रशासन ने कराई है खाली
-सच्चाई यह कि अभी भी यहां प्लाट नंबर 30 पर कब्जा बरकरार है
वृन्दावन, 09 नवम्बर 2017,(VT) हाईकोर्ट के तमाम आदेशों के बाद भी यूपीएसआइडीसी के मामले में ऐसी राह छोड़ दी जा रही है, जिसका लाभ कब्जाधारियों को मिल रहा है। हाईकोर्ट में यहां की जमीन को कब्जा मुक्त कर भूमि यूपीएसआइडीसी को हस्तांतरित किए जाने का हलफनामा दिया गया है। सच्चाई यह है कि अभी भी यहां प्लाट नंबर 30 पर कब्जा बरकरार है।
औद्योगिक क्षेत्र में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का अक्षरशः अनुपालन न करने के पीछे आखिर क्या कारण हो सकता है। सत्ताधारी दल के इशारे पर जयगुरुदेव संस्था के साथ क्या नरमी बरती जा रही है। इसी तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। अन्यथा यह संभव नहीं है कि जिला प्रशासन बिना भूमि खाली कराए हस्तांतरण का शपथ पत्र हाईकोर्ट में लगा दे और विवादित भूमि पर संस्था का जारी निर्माण भी न रोका जाए। याची के पैरोकार द्वारा साक्ष्य देने के बाद गलत शपथ पत्र लगाने के मामल में हाईकोर्ट के संज्ञान में यही तथ्य लाया गया।
दरअसल हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ औद्योगिक क्षेत्र साइट ए पर हुए अवैध कब्जों पर लगातार सुनवाई में सख्त रुख अपनाए हुए है। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में आदेश दिया था कि पांच में से चार पार्क खाली कराए जाएं और जयगुरुदेव संस्था के कब्जे वाली जगह खाली कराकर यूपीएसआइडीसी के कब्जे में दी जाए। जिला प्रशासन और यूपीएसआइडीसी ने करीब दो माह पहले अभियान चलाकर हाईवे पर जयगुरुदेव पेट्रोल पंप से सटी भूमि खाली कराई और आदेश अनुपालन का दावा कर दिया।
जिलाधिकारी ने हाईकोर्ट में इस आशय का शपथ पत्र भी दे दिया कि भूमि यूपीएसआइडीसी को दे दी गयी है। हकीकत में उस प्लाट संख्या 30 पर निर्माण भी चल रहा है। तथ्य यह है कि राजस्व रिकार्ड में जितनी भूमि दर्ज है, उससे कम भूमि खाली कराई गई है। शपथ पत्र के बाद याची राजेंद्र सिंह के पैरोकार ने भूमि पर वास्तविक स्थिति के फोटोग्राफ और वीडियो अदालत को दिखाए और कहा कि आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है। इस मामले में जिलाधिकारी का कहना है कि प्लाट 30 के दो भाग हैं। इसमें एक भाग पर यूपीएसआइडीसी का दावा है। इसे खाली कराकर उसे दिया जा चुका है। इसी बात का स्पष्टीकरण अदालत में दिया गया। अब फिर अदालत ने क्या आदेश दिया है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
यूपीएसआइडीसी के एमडी की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया कि पार्क खाली करा लिए गए हैं, जबकि हकीकत यह है कि चारों पार्कों में से किसी पर पहले से निर्मित फैक्ट्री चल रही है तो किसी पर गोदाम है और किसी पर नंदीशाला भी बनी हुई है। कोर्ट ने यूपीएसआइडीसी को भी फटकार लगाई है। याची के अनुसार एक पार्क पर स्थित संस्कार स्कूल के पैरोकार ने भी कुछ रिलीफ मांगी, जिस पर उसे भी फटकार लगी है। अदालत ने कहा है कि स्कूल को छह माह का समय दिया गया है, जबकि यह प्लाट स्कूल के लिए आवंटित नहीं है। DKS

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