वायु प्रदूषण: कान्हा की नगरी पर भी छाया स्माॅग का असर, पर्यावरण हुआ जहरीला

– 191 माइक्रो ग्राम प्रति मीटर क्यूब पाया गया, 144 माइक्रो ग्राम प्रति मीटर क्यूब होनी चाहिए
वृन्दावन, 12 नवम्बर 2017,(VT)  दिल्ली और एनसीआर के आसमान में कई दिन से फैले स्मॉग का असर मथुरा के आसमान पर भी पड़ा है। वायु प्रदूषण सामान्य से ज्यादा बना हुआ है और लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। बदलते मौसम में खांसी-जुकाम से भी लोग पीड़ित होने लगे हैं।

इस बार दीपावली पर दिल्ली में आतिशबाजी प्रतिबंधित रही। मथुरा में कम आतिशबाजी हुई, बावजूद इसके दीपावली के तीन दिन बाद तक वायु प्रदूषण सामान्य से लगभग दोगुना बना रहा था, लेकिन बाद में इसमें गिरावट आती चली गयी। इस बीच एक नवंबर के बाद से तापमान में गिरावट आने के साथ ही मथुरा के वायु मंडल में भी प्रदूषण बढ़ रहा है। सप्ताह भर से दिल्ली समेत एनसीआर में स्मॉग बढ़ रहा है, लिहाजा करीब डेढ़ सौ किलो मीटर दूरी पर बसे मथुरा में भी एक सप्ताह में दो दिन वायु प्रदूषण मापा गया है।
पिछले 6 नवंबर को सुबह के समय भारी धुंध और धुआं बना रहा। एक्सप्रेस वे पर तमाम वाहन भिड़ गए। लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई तो आंखों में जलन की शिकायत भी सामने आई। खांसी के मरीज भी अचानक बढ़ रहे हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वायु प्रदूषण की माप की है, जो सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा पाया गया है। सबसे पहले 3 नवंबर की सुबह वायु प्रदूषण 191 माइक्रो ग्राम प्रति मीटर क्यूब पाया गया। सामान्य वायु मंडल की स्थिति 144 माइक्रो ग्राम प्रति मीटर क्यूब होनी चाहिए।
हालांकि इसके बाद से वायु मंडल फिर से सामान्य स्थिति को ओर आ रहा है, लेकिन यह अब भी 178 माइक्रो ग्राम प्रति मीटर क्यूब के स्तर पर है। हालांकि शुक्रवार को मथुरा के वायु मंडल में स्मॉग नहीं रहा, लेकिन लोगों को अब भी आंखों में जलन और सांस लेने में शिकायत बनी हुई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक सहायक डॉ. नीरज चतुर्वेदी के अनुसार आसपास के नगरों के सापेक्ष मथुरा का वायु मंडल काफी हद तक सामान्य स्थिति में है। तापमान की गिरावट के साथ यह स्थिति हमेशा बनती है।
ठंडी हवाओं ने बनाया है एयर लॉकरू भौतिक विज्ञान के नियम के अनुसार गर्म हवा ऊपर की कक्षा में रहती है, क्योंकि वह हल्की होती है, जबकि ठंडी हवा का वजन अधिक होता है। सामान्य गर्म हवा और डीजल-पेट्रोल चालित वाहनों, एयर कंडीशनर, कारखाने एवं रेफ्रीजरेटर से निकलने वाली हवा की प्रकृति अलग प्रकार की होती है। सूर्य देव उत्तरायण से दक्षिणायण की ओर प्रस्थान कर गए हैं और सूर्य किरणों का प्रभाव कम पड़ने लगा है, लिहाजा ठंडी हवाओं ने गर्म हवाओं के ऊपर एयर लॉक बना दिया है, जिसकी वजह से प्रदूषित हवा ऊपर नहीं जा पा रही और वायु मंडल प्रभावित हो रहा है। DKS

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