पश्चिम बंगाल और उड़ीसा की खींचतान के बाद अब मथुरा से भी दावा, रसगुल्ला की खोज ब्रज से

– समिति का कहना है कि जैसे भगवद्गीता सत्य है, वैसे ही रसगुल्ले यानि खीरमोहन पर है ब्रजभूमि का अधिकार

वृन्दावन, HT 17 नवम्बर 2017,(VT) रसगुल्ले के ईजाद को लेकर पश्चिम बंगाल और उड़ीसा की खींचतान के बाद अब मथुरा से भी इस पर दावा जताया गया है। अखिल भारतीय सर्वसमाज संघर्ष समिति ने इसे मूलतः खीरमोहन बताते हुए पेटेंट के लिए राष्ट्रपति को पत्र भेजा है।
इस संबंध में समिति ने जिलाधिकारी मथुरा को राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में कहा है कि पं. बंगाल और उड़ीसा ने हमारी खीरमोहन पर दावा ठोका है, वह असत्य और निराधार है। हकीकत में खीरमोहन (छेना रसगुल्ला) ब्रज की धरोहर मिठाई है।
इसका वर्णन ऐतिहासिक-पौराणिक गाथाओं में है। मैया यशोदा ने लाला मोहन को हजारों वर्ष पूर्व सर्वप्रथम खीरमोहन बनाकर खिलाया था। समिति का कहना है कि जैसे भगवद्गीता सत्य है, वैसे ही रसगुल्ले यानि खीरमोहन पर ब्रजभूमि का अधिकार है। समिति ने खीरमोहन को ब्रजभूमि के नाम कराने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने वालों में समिति के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. जेएस जाट, सोमेश्वरप्रसाद पाठक, सीमा सिंह, सुभाष, राधेश्याम, रामवीर सिंह, ठा. अशोक सिंह आदि शामिल थे। DKS

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