परिश्रम की पराकाष्ठा तक पहुंचना ही गीता का असली संदेश

– गीता जयंती पर नगर के मंदिर, मठ और आश्रमों में धार्मिक व आध्यात्मिक आयोजन हुए
वृन्दावन, 30 नवम्बर 2017,(VT) गीता जयंती पर नगर के मंदिर, मठ और आश्रमों में धार्मिक व आध्यात्मिक आयोजन हुए। स्वामी अखंडानंद सरस्वती आश्रम में आयोजित विद्वत संगोष्ठी में स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती ने कहा कि सारी व्याधियों की जड़ मोह है। गीता का तात्पर्य मोह निवृत्ति में है। डॉ. स्वामी गोविंदानंद सरस्वती, स्वामी सेवानंद ब्रह्मचारी ने कहा परमात्मा दुर्लभ नहीं है। परमात्मा सुलभ है, परंतु भगवत्प्राप्त महात्मा दुर्लभ है। शिवचेतन दास, रंगानंद, संतोषानंद, कैलाशानंद, अभेदानंद, सुरेंद्र भाई शाह, विद्याधर तिवारी, श्याम रामानी मौजूद रहे।
ब्राह्मण महासभा ने गीता जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया। इसकी शुरूआत गीता उपदेश चित्रपट पर माल्यार्पण के साथ हुई। व्यासघेरा स्थित कार्यालय पर आयोजित संगोष्ठी में गोविंद किशोर गोस्वामी ने कहा गीता हमको जीवन की समस्याओं से निजात दिलाती है।
सुरेशचंद्र शर्मा, रमेशचंद्र शास्त्री ने कहा गीता धर्म निरपेक्ष ग्रंथ है। रेवती पंडा ने गीता को संस्कृति की आत्मा बताया। डॉ. विनोद बनर्जी ने कहा कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान कृष्ण ने अजरुन को गीता का संदेश दिया। डॉ. देवेंद्रनाथ शास्त्री, जगदीश नीलम, नंदकुमार पाठक, डॉ. राजेश शर्मा, गो¨वद पचैरी, कौशलकिशोर गौतम, कृष्णचंद्र गौतम, श्यामसुंदर गौतम, रामनारायण ब्रजवासी, योगेश द्विवेदी, दीनानाथ, विनायक भारद्वाज, पूरनकिशोर शर्मा, उपेद्र गोस्वामी मौजूद रहे। DKS

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