सारे जग से निराली, ब्रज-वृन्दावन की दिवाली, श्यामसुंदर बने कृष्णकाली

– रजत हटरी में विराजमान होंगे श्रीजी और श्यामसुंदर

-शुभ दीपावली: विशेष आलेख..

वृन्दावन, 19 अक्टूबर 2017,(VT) ब्रज-मंडल की दीपावली भी कुछ कम नहीं। यह ब्रज की दिवाली का अपना वैशिष्ट्य है कि कार्तिक के महीने में पूरे माह दीपावली महोत्सव की धूम रहती है। उड़ीसा, बंगाल, बिहार, आसाम तक के श्रद्धालु ब्रज को लघु भारत बना देते हैं। ब्रज की सांस्कृतिक राजधानी वृन्दावन की कुंज-गलियों, यमुना तट और परिक्रमा में श्रद्धा का सैलाब दीपावली की अपनी विशेषता है।
कार्तिक के पूरे पवित्र महीने, ये श्रद्धालु श्रीधाम वृन्दावन में निवास करते हुए नियम सेवा करते हैं, जिसमें यमुना स्नान, लीला स्थलियों की सोहनी सेवा, वन परिक्रमा एवं संकीर्तन प्रमुख हैं।
प्रत्येक मंदिरों की अपनी अलग-अलग परम्परा से मनाये जाने वाली दीपावली जब औैर भी खास हो जाती है कि जब इसमें ब्रज की भक्ति और शक्ति का छौंक लग जाये। पंचदिवसीय इस महोत्सव में धनतेरस, रूप चैदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज मनने वाले इस महोत्सव में ब्रज में प्रत्येक मंदिर विराजमान ठाकुर और ठकुराइन को अपनी-अपनी परम्परानुसार लाड़ लड़ाया जाता है।
ब्रज के प्रमुख मंदिर श्रीराधारमण मंदिर, राधावल्लभ मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, गोकुलानंद, राधागोविन्द मंदिर, मदनमोहन मंदिर, राधाश्यामसुंदर मंदिर और राधादामोदर मंदिर में दीपोत्सव भी होगा, कतारों में लगे हुए अनेकों दीप कृृष्णकालीन समय की याद दिलायेंगे।

वहीं आज नगर के राधाश्यामसुंदर में ठा.श्यामसुंदर आज दीपावली के दिन कृष्णकाली के वेश में दर्शन देंगे, हाथ में वंशी और लकुटी के जगह आज श्रीश्यामसुंदर फरसा और नर—कंकाल की माला धारण करेंगे। DKS

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