श्रीराम के जयकारों से गूंजी धर्मनगरी, धूं-धूं कर जल उठा रावण

– बुराई पर अच्छाई की जीत 
वृन्दावन, 01 अक्टूबर, 2017,(VT) भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर में जिस धरा पर अत्याचारी कंस का अंत किया था, उसी पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अहंकारी रावण का वध कर दिया। अंतर सिर्फ इतना है कि कलियुग का ये रावण त्रेतायुग वाला वो लंकापति नहीं था, जिसने सीता माता का हरण किया था, बल्कि ये वह दशानन था, जो हमारे समाज में व्याप्त तमाम बुराइयों का नेतृत्व कर रहा था। जैसे ही श्रीराम का तीर रावण की नाभि में लगा, तो रामलीला मैदान जयश्री राम के जयघोष से गूंजने लगा।
रावण का पुतला दहन देखने के लिए हजारों शहरवासी उमड़ पड़े। पुतला दहन से पूर्व रामलीला मैदान में रावण और अहिरावण वध की लीला का मंचन हुआ। अहिरावण चाचा विभीषण का वेश बनाकर रामादल में मोहिनी मंत्र से सभी को नींद में सुला देता है और राम-लक्ष्मण को पाताल में कामदा देवी की बलि चढ़ाने ले जाता है। हनुमानजी प्रभु की खोज में पाताल लोक जाते हैं और अहिरावण का वध कर उन्हें ले आते हैं।
इसके बाद रावण स्वयं युद्ध करने जाता है। युद्ध में रावण मायावी शक्तियों का प्रयोग करता है, लेकिन राम उन्हें नष्ट कर देते हैं और रावण के नाभि में बने अमृत कुंड पर अग्नि बाण चलाते। बाण लगते ही रावण राम-राम कहते हुए धरी पर गिर पड़ता है। रावण श्रीराम से कहता है कि विजय उसी की हुई है, क्योंकि वह आपके बैकुण्ठ लोक जा रहा है, लेकिन आप मेरे जीवित रहते हुए लंका में प्रवेश नहीं कर पाए। इस पर श्रीराम मुस्कुरा देते हैं।
मैदान में प्रभु के अग्नि बाण चलाते ही रावण के पुतले की नाभि से अमृत वर्षा, मुस्कुराहट व घोर गर्जना के साथ धू-धू कर जल उठा। यह देखकर पूरे मैदान में दर्शकों का हुजूम राजा रामचंद्र की जय-जयकार करते हैं। इस दौरान भव्य आतिशबाजी हुई । DKS

एक उत्तर दें छोड़ दो

Your email address will not be published. Required fields are marked *