श्रीकृष्ण की लीलास्थली वृन्दावन और बरसाना को मिला तीर्थस्थल का दर्जा

-ठीक जैसे वृन्दावन को अलग तीर्थस्थल बनाया गया हैं, ठीक वैसे ही मथुरा—वृन्दावन नगर निगम में से वृन्दावन को पृथक कर अलग नगरपालिका या नगर निगम बनाया जाए।
-वृन्दावन का अपना अलग महत्व और मथुरा का अपना अलग महत्व
– दोनों नगरों की संस्कृति न की जाए एक

वृन्दावन, 27 अक्टूबर 2017,(VT) करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था का केंद्र भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि के दो प्रमुख स्थल वृंदावन और बरसाना के तीर्थ स्थल घोषित होने से यहां की तस्वीर अब देश-दुनिया के तीर्थ यात्रियों की भावना और अंतरमन को सुकून देने वाली होगी। धार्मिक वस्तुओं के कारोबार को पंख लग जाएंगे। होटल और पर्यटन व्यवसाय में भी बढ़ोतरी होगी।
अभी तक देश दुनिया से ब्रज में आने वाले श्रद्धालु वृंदावन और बरसाना की बदहाल तस्वीर देखकर आहत होते थे। कहीं कचरे के ढेर लगे हुए हैं तो कहीं सड़कों जर्जरता उनको पीड़ा पहुंचाती है। घंटों तक जाम का सामाना करना पड़ता है। सुबह-शाम मंदिर खुलते हैं और दोपहर में बंद होने के बाद यात्रियों के घूमने-फिरने के लिए कोई स्थल भी नहीं हैं। कुंड सरोवर तक में मैला पानी भरा है। इनके घाट किनारे बैठना भी तीर्थयात्री पंसद नहीं करते हैं।
इसलिए पिछले एक दशक में फ्लो¨टग तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ी है, जबकि ब्रज यात्रा के लिए यहां ठहरने वाले यात्रियों का ग्राफ नीचे गिरा है। विशेष अवसरों पर तीर्थयात्रियों को फुटपाथ और सड़कों पर रेन बसेरा करना पड़ता है। तीर्थ स्थल बन जाने से अब तीर्थयात्रियों को इस तरह की मुसीबतों से छुटकरा मिल जाएगा। यहां की छवि में निखार आएगा। धार्मिक वस्तु, होटल और पर्यटन व्यवसाय में चार चांद लग जाएंगे। स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया होंगे।
उठाए जाएंगे यह कदम:-
-अंडा, मांस, मछली, शराब की बिक्री प्रतिबंधित हो जाएगी और कट्टीघर भी नहीं खुल पाएंगे।
-कुंड, सरोवर का सुंदरीकरण होगा और इनके जल को पवित्र कर स्नान के योग्य किया जाएगा।
-घूमने फिरने के लिए पार्क बनाए जाएंगे, ठहरने के लिए सरकारी गेस्ट हाउस भी खोले जाएंगे।
-यात्रियों की आवाजाही को सड़कें बनाई जाएंगी। उनके किनारे फलदार और छायादार पौधे रोपे जाएंगे।
-यातायात को सुगम बनाने के लिए फ्लाई ओवर बनाए जाएंगे और वाहनों के लिए पार्किंग बनेगी।
-बस स्टैंड का विकास धार्मिक स्थल के अनुरूप होगा। एयरकंडीशन मिनी बसें संचालित की जाएगी।
-धार्मिक, एतिहासिक और ब्रज संस्कृति को संरक्षित करने का कार्य कराया जाएगा। ये हैं संभावनाएं
-भविष्य में बरसान को रेलवे ट्रेक से जोड़ा जा सकता है।
-राधाष्टमी और लठामार होली मेला को राजकीय मेला घोषित किया जा सकता है।
-वृंदावन और बरसाना को एक ही गलियार से जोड़ दिया जाएगा। बरसाना की अष्टसखी गांवों का हो सकता है सर्वांगीण विकास।
इन कार्यो में आएगी तेजी
-यमुना रिवर फ्रंट, पिकनिक स्पॉट, फेसिलिटी सेंटर, शॉ¨पग मॉल, प्रेक्षागृह निर्माण कार्य में तेजी आएगी। स्वामी हरिदास, श्रीहित हरिवंश महाप्रभु, चैतन्य महाप्रभु के उत्सव भव्य होंगे। वृंदावन के प्राचीन घाटों के सुंदरीकरण का कार्य तेज होगा। बरसाना में बनाए जा रहे रोपवे के निर्माण का कार्य भी गति पकड़ेगा।

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