रामानुज सम्प्रदाय के सिद्धांत की विशिष्टता है कि भक्ति और ज्ञान

– ब्रज संस्कृति शोध संस्थान द्वारा प्रासंगिक विषयों पर आयोजित किया गया व्याख्यान
वृन्दावन, 05 अक्टूबर 2017,(VT) ब्रज संस्कृति शोध संस्थान में मंगलवार को श्रीमद् रामानुजाचार्य के सिद्धांत की तत्कालीन एवं समसामयिक परिदृश्य में प्रासंगिकता विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की शोध अध्येता डॉ. मीनाक्षी जोशी ने कहा कि रामानुज वाणी सनातन परंपरा की प्रेरणादायी शक्ति है। भक्ति के धरातल से मानवीय मूल्यों की संरक्षा और इन्हें आत्मसात कर सन्मार्ग पर चलने का जो मार्ग श्री रामानुज ने प्रशस्त किया, वह अद्यतन प्रासंगिक है।
मंदिर गोदा बिहार में हुए व्याख्यान में महंत वृंदावन आचार्य ने कहा कि श्री रामानुज के सिद्धांत सनातनी परंपरा का आदर्श उदाहरण हैं। मुख्य अतिथि डॉ. चंद्रप्रकाश शर्मा ने कहा कि रामानुज सम्प्रदाय के सिद्धांत की विशिष्टता है कि भक्ति और ज्ञान के सम्मिलित स्वरूप से यहां मानव कल्याण को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। वृंदावन शोध संस्थान के निदेशक सतीश चंद्र दीक्षित एवं आचार्य विष्णु मोहन नागार्च ने कहा कि भारत की भक्ति ज्ञान परंपरा को आधारभूत स्वरुप प्रदान करने में रामानुज का सिद्धांत प्रमुख कड़ी है।
संस्थान सचिव लक्ष्मी नारायण तिवारी ने कहा कि पोथी निधि प्रकल्प के अंतर्गत संचालित यह व्याख्यानमाला इसी उद्देश्य के साथ अग्रसर है कि संस्कृति प्रेमी, सुधीजन एवं शोध अध्येता मिलकर राष्ट्र की भावी पीढ़ी के लिए अपनी गौरवशाली परंपरा से साक्षात्कार का एक समृद्ध मंच तैयार कर सकें। शुभारंभ श्रीविग्रह के समक्ष पुष्पार्चन एवं प्रभु आराधना से हुआ। डॉ. मीनाक्षी जोशी को उत्तरीय एवं श्री फल प्रदान कर सम्मानित किया गया। डॉ. मधुर बिहारी गोस्वामी, डॉ. राजेश शर्मा, अशोक शर्मा अज्ञ, प्रगति शर्मा, तिरुपति स्वामी, युवराज, शाश्वत नारायण, रैना पालीवाल, आदित्य मिश्र, लखन मेहता, राजेश कुमार सेन आदि प्रमुख लोग मौजूद थे। DKS

एक उत्तर दें छोड़ दो

Your email address will not be published. Required fields are marked *