बरसाना स्थित श्रीराधारानी की प्रिय स्थली गहवरवन घोषित हो वन्य विहार

40वें ब्रज में कुर्सी दौड़, खो-खो प्रतियोगिता हुई
वृन्दावन, 08 अक्टूबर 2017, (VT)राधारानी के सबसे प्रिय गहवरवन को राधारानी जीव जंतु वन्य विहार घोषित करने की मांग गुरुवार को एक बार फिर 40वें ब्रज एवं पर्यावरण सम्मेलन में उठी। पर्यावरण प्रेमियों ने पौधरोपण, कुर्सी दौड़ और खो-खो प्रतियोगिता भी कराईं। शाम को भजन संध्या का आयोजन किया गया।
गहवरवन बचाओ आंदोलन समिति के 40वें ब्रज एवं पर्यावरण सम्मेलन का नेतृत्व बंशीधर अग्रवाल ने किया। ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा ने कहा कि करीब 60 साल पहले गहवरवन का स्वरूप बिगड़ा हुआ था। वन से लकड़ी काटी जा रही थी। प्राचीन पर्वत से खनन किया जा रहा था। गहवरवन बचाओ आंदोलन के नायक रहे बंशीधर अग्रवाल के सहयोग से 28 साल तक लड़ाई चली और अंत में जीत हुई। 24 अक्टूबर 1997 को 6.845 हैक्टेयर भूमि को आरक्षित वन घोषित किया गया। संत ने कहा कि इस अदभुत वन को राधारानी ने अपने हाथों से लगाया था। बंशीधर अग्रवाल ने कहा कि गहवरवन को बचाने में वह रमेश बाबा के आशीर्वाद से ही सफल हुए थे। उन्होंने कहा कि इस दिव्य वन को राधारानी जीव जंतु वन्य विहार घोषित कराने और वन विभाग की चैकी खुलवाने की लड़ाई अभी जारी है।
राजस्थान में कामा और डीग तहसील के मध्य पहाड़ को भी राधारानी वन्य जीव जंतु विहार घोषित कराए जाने के लिए उनकी मुख्यमंत्री वशुंधरा राजे से बातचीत हो चुकी हैं। मानमंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने कहा कि वनों में सबसे श्रेष्ठ वन गहवरवन है। कथा वाचक कीर्ति किशोरी ने कहा कि गहवरवन में आज भी राधाकृष्ण की लीलाओं की अनुभूति होती है। पर्यावरण प्रेमियों ने गहवरवन में नीम, शाल, आम, गुलाब, चमेली के पौधे रोपे। महिलाओं ने कुर्सी दौड़, खो-खो और पासिंग दा पासिंग प्रतियोगिता में बढ़चढ़कर भाग लिया।
इस अवसर पर राजीव गोयल, कृष्णकुमार अग्रवाल, रविप्रकाश, प्रवीण गुप्ता, ललित गुप्ता, रानी अग्रवाल, रेनू अग्रवाल, कमलेश गोयल, बबीता अग्रवाल, अलका भाटिया, अंजू भाटिया, उमेश गर्ग व जितेंद्र गोयल आदि मौजूद थे।

एक उत्तर दें छोड़ दो

Your email address will not be published. Required fields are marked *