नहीं रूके अवैध निर्माण, तो भर—भराकर गिर सकती है ऐतिहासिक धरोहर गोविन्ददेव मंदिर

 -गौमा टीले के लगातार अवैध खनन व आसपास के लोगों द्वारा अपने मकानों में बेसमेंट (तल घर) बनवाने के कारण मंदिर के धंसने के आसार 

-पिछले लगभग 10 वर्षों से गोविदंदेव मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल करने को कर रहे हैं लगातार पत्राचार 

-स्थानीय निवासियों की बदनीयती एवं अधिकारियों के निकम्मेपन, भ्रष्टाचार के कारण नष्ट हो रही है धरोहर 

-नहीं हुई सुनवाई तो माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लेंगे शरण 

वृन्दावन, 15 अक्टूबर, 2017, (VT)नगर के प्रमुख देवालयों में से एक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित ठा. गोविंददेव मंदिर के आसपास बनते अवैध बहुमंजिला मकानों के कारण इस ऐतिहासिक धरोहर का सौंदर्य नष्ट हो रहा है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता महंत मधुमंगल शरण दास शुक्ल ने गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए भारतीय पुरातत्व विभाग नई दिल्ली के महानिदेशक एवं मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मंडलायुक्त, आगरा को लिखे पत्रों में इस अद्भुत विश्वप्रसिद्ध मंदिर धरोहर बचाने की मांग की है। 

सामाजिक कार्यकर्ता महंत मधुमंगल शरण दास शुक्ल ने पत्र में लिखा है कि गोविंद घेरा स्थित गौमा टीले पर लाल पत्थर से निर्मित यह ठा.गोविंददेव मंदिर ब्रज के प्रमुख मंदिरों से एक है। इस मंदिर का वास्तु एवं स्थापत्य कला बेजोड़ कलाकारी का अद्भुत नमूना है। इस मंदिर का निर्माण इस तरह से किया गया कि सूर्योदय होने पर सूर्य की पहली किरण मंदिर में स्थापित श्रीविग्रह के श्रीचरणों में अपना प्रणाम निवेदित करती हैं, साथ ही शरद पूर्णिमा को चंद्रमा का सीधा प्रकाश ठाकुरजी के मुखारविन्द पर पड़ता है, तब जाकर पूरे वृन्दावन में शरद पूर्णिमा का उत्सव शुरू होता है। इस मंदिर की ऐतिहासिकता का जिक्र अनेकों देशी-विदेशी विद्वानों ने ब्रज संस्कृति का वर्णन करते समय प्रमुखता से लिखा है। इस मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने संरक्षित कर धरोहर घोषित कर रखा है। 

महंत ने पत्र में लिखा कि वह पिछले लगभग 10 वर्षों से केंद्र सरकार एवं यूनेस्कों से लगातार पत्राचार कर रहे हैं कि भारतीय संस्कृति के इस नायाब भेंट रूपी मंदिर को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया जाए, लेकिन सर्वेक्षण के अधिकारियों के निकम्मेपन, भ्रष्टाचार एवं विरासतों के प्रति उदासीनता के रवैऐ के कारण इस मंदिर के इर्द-गिर्द नियमों के विरूद्ध लगातार ऊंची-ऊंची बहुमंजिली इमारतें/मकानों का निर्माण धड़ल्ले विगत कई वर्षों से लगातार हो रहा है तथा वर्तमान में भी चल रहा है। स्थानीय निवासियों की बदनीयती के कारण आसपास के मकानों में बिना किसी अनुमति के बेसमेंट (तल घर) बनाए जा रहे हैं।  जिसके कारण गौमा टीले के अस्तित्व को लगातार खतरा उत्पन्न हो रहा है। समय रहते यदि नहीं जागे, तो लगातार होते अवैध खनन के कारण गौमा टीला एवं इस पर स्थापित गोविंददेव मंदिर गिरकर कभी भी नष्ट हो सकता है और यह हमारे इतिहास का सबसे बुरा दिन होगा जब हमारे निजी स्वार्थ के कारण एक विश्वप्रसिद्ध धरोहर जमींदोज हो जाएगी। 

पुरातत्व विभाग नई दिल्ली के महानिदेशक एवं विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं आगरा मण्डल के आयुक्त को पत्र के अंत में सामाजिक कार्यकर्ता ने गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि अगर समय रहते इस संबंध में कठोरतम कार्यवाही आपके द्वारा नहीं की गई, तो इस पवित्र धरोहर की रक्षा के लिए उन्हें माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की शरण लेने को बाध्य होना पड़ेगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी पदेन एवं व्यक्ति तौर पर आपकी एवं स्थानीय लोगों की होगी।  DKS

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