दीपोत्सव विशेषः चौपड़ की बिसात पर राधा से हार गए कृष्ण

वृन्दावन, 21 अक्टूबर 2017,(VT) दीपों की रोशनी में जगमग दीपावली की रात कृष्ण और राधा ने चौपड़ खेली। चांदी और हाथी दांतों से बनी गोटियों से शह और मात की चालें चली गईं। दोनों ओर से एक-एक चाल के लिए काफी माथापच्ची हुई। अंत में राधाजी ने खेल में बाजी मार ली।
दीपावली की रात राधा और कृष्ण के बीच चौपड़ खेलने की नगर के मंदिर राधारमण मंदिर एवं श्रीराधाबल्लभ मंदिर में निभाई गई। मंदिर परिसर में ठाकुरजी ने दीपावली पर चांदी की हटरी में बैठ भक्तों को दर्शन दिए। यहीं उनका दरबार सजाया गया। श्रीविग्रह के सामने चौपड़ बिछाई गई। का निर्वहन करते हुए सेवायतों के दो पक्ष चौपड़ की बिसात पर आमने-सामने बैठे। एक पक्ष ने श्रीकृष्ण का तो दूसरे पक्ष ने राधाजी का खेल में प्रतिनिधित्व किया। चौपड़ के खेल को देखने के लिए मंदिर में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा।
सेवायतों द्वारा पदगयान हुआ.. रैन दिवारी की सुखकारी, चौपड़ खेले प्रीतम प्यारी..।

इसके साथ ही चैपड़ की बिसात पर शह और मात का खेल चलना शुरू हुआ। पद की एक एक पंक्ति के आधार पर ही चालें चली गईं। करीब दो घंटे चले इस खेल में राधाजी ने बाजी मार ली। के तहत चैपड़ में राधाजी की ही जीत होती है।
’चांदी और हाथी दांतों की गोटियों से चली गईं चाल पुराना’
दीपावली के दिन चैपड़ के खेल पर केंद्रित पदों का गायन और सृजन का इतिहास पुराना और समृद्ध है। पांडुलिपि अध्येता डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि मुद्रण तकनीक से पहले हर मंदिर की के अंतर्गत वर्षभर के उत्सव क्रम में इन पदों का संकलन होता था।

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