दक्षिण से पधारे ब्राहमणों ने कराया संकर्षण भगवान का अभिषेक

– ब्रज फाउण्डेशन के निर्देशन में बनाया गया है यह ऐतिहासिक कुण्ड
– नादस्वर के बीच हुआ जलाभिषेक
वृन्दावन, 05 अक्टूबर 2017,(VT) आखिर वह घड़ी आ ही गई, जिसका ब्रजवासियों को कई दिन से इंतजार था। आन्यौर स्थित परिक्रमा मार्ग मंगलवार को दक्षिण और उत्तर की शैली का गवाह बना। दक्षिण भारत के नादस्वरम के बीच ब्रज के दाऊ दादा संकर्षण भगवान का जलाभिषेक किया गया। चार दिवसीय उत्सव के पहले दिन 31 पुरोहितों ने 34 फुट ऊंचे विग्रह का अभिषेक किया।
आन्यौर का संकर्षण कुंड कभी बदबूदार पोखर हुआ करती थी, लेकिन अब यह स्थान नयनाभिराम कुंड बन गया है। इस परिसर में पर्वतराज गोवर्धन की तलहटी में दाऊ दादा की 34 फुट ऊंची मूर्ति आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पहले दिन दक्षिण भारत के नादस्वरम संगीत के बीच 31 पुरोहितों की अगुवाई में सुबह से ही अभिषेक शुरू हो गया। पुरुष सिर्फ धोती पहनकर और महिलाएं साड़ी पहने अभिषेक के कलश लेकर 35 फुट ऊंची सीढ़ी पर उत्साह से चढ़ रहे थे। महिलाओं ने दाऊ दादा के मुकुट पर मस्तक टिकाकर अपने परिवार के कल्याण की कामना की।
उधर, यज्ञ मंडप में पुरोहितों ने द ब्रज फाउंडेशन के अध्यक्ष विनीत नारायण से संकल्प करवाकर वैदिक अनुष्ठान शुरू किए। दोपहर डेढ़ बजे तक चले अनुष्ठानों में यज्ञ आदि के अलावा संकर्षण भगवान के बड़े और छोटे विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की वैदिक विधियां शुरू कीं। ऊंचे विग्रह के सामने दर्शन घाट पर दर्पण रखकर भगवान का छायाधिवास किया गया। दिन ढलने के बाद भी अभिषेक के लिए ब्रजवासी उमड़ते रहे। शाम सात बजे से देशभर से आए भक्तों के लिए रासलीला का मंचन किया गया।
चुनौती था पर्वत खोजना: ब्रज फाउंडेशन के अध्यक्ष विनीत नारायण को शिल्पशास्त्रियों ने बताया कि शिल्पशास्त्र के अनुसार पुरुष और स्त्री प्रकृति के पत्थर अलग होते हैं। 1संकर्षण भगवान या तिरुपति बालाजी का विग्रह बनाने के लिए तिरुमाला की पवित्र पर्वत श्रृंखला में ऐसा पर्वत खोजना चुनौती था।

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