नवरात्र विशेष: ब्रज रक्षिका के नाम से भी प्रसिद्ध है श्रीनरी सेमरी देवी

-​नवरात्र के समय आयोजित विशाल मेले में काफी संख्या में जुटते हैं श्रद्धालु

वृन्दावन, 24 सितम्बर 2017, (VT) यूं तो भारत के कोने कोने में देवी पीठ हैं । विश्व प्रसिद्द पौराणिक नगरी कृष्ण की लीला स्थली मथुरा दिल्ली राज मार्गपर छाता के निकट एक देवी पीठ है -नरी- सेमरी जो मथुरा-आगरा के आसपास क्षेत्रों की मातृदेवी-कुलदेवी है| बृज रक्षिका के नाम से जानी जाती है।

कहते हैं यही वह स्थान है जहां कृष्ण बलराम को कंस द्वारा कुश्ती का आमंत्रण मिला था।नरी सेमरी मंदिर का मुख्य द्वार आगरा-मथुरा-दिल्ली राजमार्ग पर है।शारदीय नवरात्रि के समय बहुत बड़ा मेला लगता है अतः अस्थायी रेल व बस स्टेशन बनाए जाते हैं जो मंदिर के गेट के ठीक सामने उतारते हैं ।जन सामान्य व स्थानीय निबासियों के अनुसार यह नरी सेमरी माता का मंदिर है जो बृज रक्षिका है और एक भक्त द्वारा बनबाया गया था|

जब माता के उसकी कुटिया पर आने पर भक्त द्वारा न पहचानने पर माता पैदल ही वापस चलदी और भक्त को ज्ञात होने पर उसने यहाँ आकर माता के दर्शन किये और फिर मंदिर बनबाया । इस मंदिर में तीन मूर्तियाँ है , जो भारत में कहीं नहीं है सिवाय वैष्णों देवी मंदिर के जो तीन पिंडी रूपों में है। नरी समरी में तीन सुन्दरअद्भुत मूर्तियाँ है जो कि सफ़ेद, काले व सांवले रंग की हैं।

मथुरा गजेटियर व ग्रंथों में खोजने पर एक विशिष्ट व अद्भुत कथा का ज्ञान होता है जो बहुत कम लोंगो की जानकारी में है वस्तुतः नरी सेमरी शब्द -नारी श्यामली या नर-श्यामली (नर- नारायण ) का अपभ्रंश रूप है। यह स्थल नर- नारायण वन नाम से भी जाना जाता है। ये मूर्तियाँ वास्तव में राधा, श्री कृष्ण व ललिता जी की मूर्तियाँ है काले कृष्ण, सांवली ललिता जी व गोरी राधाजी। यह वह स्थान है जहां पर कृष्ण ने राधा को अपने नारायण रूप के दर्शन कराये थे ।

कथा यह है कि एक बार राधाजी श्री कृष्ण से अत्यधिक रूठकर इस वन चलीं आईं । ललिता के कहने पर श्री कृष्ण मनाने के लिए सुन्दर सांवली वीणा- वादिनी स्त्री का रूप रखकर वीणा बजाते हुए आये , राधा के पूछने पर अपने को श्यामली सखी बताकर राधाजी के मनोरंजन हेतु मनो विनोद करते हुए साथ रहने लगे । राधा के प्रसन्न होने पर, संदेह होने से राधा जी ने पहचान लिया परन्तु तब उनकी अप्रसन्नता समाप्त होकर वे कृष्ण लीला में लीन हो चुकीं थीं, तब श्री कृष्ण ने उन्हें अपने नारायण रूप का ज्ञान कराया। इस प्रकार यह स्थान नारी श्यामली या नरी- श्यामली, नरी-सांवरी और कालान्तर में नरी सेमरी कहलाया और बृज रक्षिका राधाजी , ललिता सहित श्री कृष्ण की पूजा होने लगी।

मुख्य मंदिर एक बड़े प्रांगण के मध्य में अवस्थित है , चारों और कुछ अन्य देवताओं के छोटे छोटे मंदिर भी बने हैं । DKS

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