नवरात्र विशेष आलेख : श्रीकृष्ण की इच्छा सौं ब्रज में शक्ति ने लियौ अवतार…

वृन्दावन, 22 सितम्बर 2017,(VT) मां भगवती सर्वविदित हैं, सर्वज्ञाता हैं, दुखियों के दुख हरने वाली हैं। ब्रज में इनसे आत्मिक जुड़ाव का एक कारण और भी है। श्री कृष्ण जन्म के साथ ही यहां भगवती देवी का भी प्रादुर्भाव होना है। दुर्गा सप्तशती में देवी के अवतरित होने का उल्लेख मिलता है कि ‘नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भसम्भवा’ मैं नन्द गोप के घर में यशोदा के गर्भ से अवतार लूंगी।
श्रीमद् भागवत पुराण में उल्लेख है कि, माता देवकी के यहाँ श्री कृष्ण अवतार और माता यशोदा के यहाँ देवी भगवती का अवतार कन्या रूप में हुआ। जब वसुदेव उस दिव्य कन्या को ले आए और कंस ने उन्हें मारना चाहा, तो कन्या साक्षात देवी का रूप लेकर, कंस को चेतावनी देते हुए, अंतर्धयान हो गई। आगे यह भी उल्लेख है कि यही देवी माँ विंध्यवासिनी और कात्यायनी के रूप में प्रसिद्ध हुईं। पौराणिक ग्रन्थों उल्लेख है- ‘ब्रजे कात्यायनी परा’ अर्थात वृंदावन स्थित पीठ में ब्रह्मशक्ति महामाया श्री माता कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध है।
श्रीमद् भागवत में भगवती कात्यायनी के पूजन द्वारा भगवान श्री कृष्ण को प्राप्त करने के साधन का सुन्दर वर्णन प्राप्त होता है। यह व्रत पूरे मार्गशीर्ष (अगहन) के मास में होता है। भगवान श्री कृष्ण को पाने की लालसा में ब्रजांगनाओं ने अपने हृदय की लालसा पूर्ण करने हेतु श्री कात्यायनी देवी का पूजन किया था। श्रीवेदव्यास जी ने श्रीमद् भागवत के दशम स्कंध के 22 वें अध्याय में उल्लेख किया है, ‘कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि’। नंदगोपसुतं देवि पतिं में कुरु ते नमरू अर्थात, हे कात्यायनी ! हे महामाये! हे महायोगिनि! हे अधीश्वरि! हे देवि! नन्द गोप के पुत्र को हमारा पति बनाओ हम आपका अर्चन एवं वंदन करते हैं।
ब्रज में देवी माँ के प्रति इसी आस्था के विभिन्न रूप, कुल देवी की परंपरा, नवरात्रि में लगभग प्रत्येक परिवार में व्रत, पूजन व पाठ का आयोजन, देवी मैया की ‘जात’ (यात्रा) और विगत कुछ वषों से स्थान-स्थान पर स्थापित होने वाली देवी प्रतिमाएं व पंडाल, के माध्यम से प्रत्यक्ष होते हैं।
मान्यता है कि, शुभ कार्य को करने से पूर्व पथवारी माता की पूजा इसलिए की जाती है कि ताकि उस कार्य को करते समय उस रास्ते (पथ) में कोई अड़चन न आए। यही कारण है कि सही पथ दिखाने वाली इस देवी को पथवारी कहा जाता है। विभिन्न देवी स्थानों को जाने से पूर्व श्रद्धालु यहाँ से आज्ञा लेकर ही अपनी यात्र प्रारम्भ करते हैं । यह भी मान्यता है कि विवाह, जात व मांगलिक कार्यत्मों आदि में इस देवी को पहले न्यौता दिया जाता है।  D.K.S.

लेखः डॉ. तरुण शर्मा, इतिहासविद्

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