जिला प्रशासन ने यमुना खादर में विधवा पुर्नवास को भूमि कर दी आवंटित

– 17 साल पूर्व महिला एवं बाल कल्याण विभाग की मांग पर जिला प्रशासन ने जगन्नाथ घाट के सामने खादर में खसरा संख्या 137 की दो एकड़ भूमि के चयन का किया था प्रस्ताव

– भूमि को 11 अक्टूबर 2002 में तत्कालीन तहसीलदार द्वारा महिला कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक के नाम कर दिया गया था दाखिल 

वृन्दावन, 07 सितम्बर 2017,(VT) प्रतिदिन यमुना खादर को लेकर न्यायालयों  द्वारा दिए जा रहे आदेशों एवं आयेदिन एनजीटी और हाईकोर्ट द्वारा करवाई जा रही तोड़फोड़ से जिला प्रशासन सबक लेना नहीं चाहती है।

ऐसा ही एक वाक्या वृन्दावन के यमुना से संज्ञान में आया।  यहां एक ओर न्यायालयों द्वारा यमुना संचरण क्षेत्र को नो कन्स्ट्रक्शन जोन की उपाधि दी गई है तो वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन ने यमुना के डूब क्षेत्र में ही बेसहारा विधवा महिलाओं को पुनर्वास के लिए भूमि आवंटन कर दी। भूमि के चिन्हांकन को लेकर राजस्व विभाग की टीम कल यमुना खादर में निरीक्षण करने पहुंची।

चिन्हांकन करते हुए कानूनगो अशोक चाहर और पटवारी ओपी पटेल ने बताया कि वृंदावन में रह रहीं विधवा और बेसहारा महिलाओं के पुनर्वास के लिए 17 साल पहले उप्र महिला एवं बाल कल्याण विभाग की मांग पर जिला प्रशासन ने जगन्नाथ घाट के सामने खादर में खसरा संख्या 137 की दो एकड़ भूमि का चयन कर प्रस्ताव पारित किया था। इस भूमि को 11 अक्टूबर 2002 में तत्कालीन तहसीलदार द्वारा महिला कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक के नाम दाखिल कर दिया गया। जिस भूमि पर निराश्रित और विधवा महिलाओं के पुनर्वास हेतु आश्रम बनाने की योजना हैं, चिन्हांकन के दौरान लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता एनके शर्मा भी मौजूद थे।

इस पर प्राधिकरण के प्रभारी सचिव एडीएम वित्त एवं राजस्व रविन्द्र कुमार ने बताया कि खादर में निर्माण को यदि कोई भूमि आवंटित की गई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। DKS

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