मुहिमः ’’यमुना की विरासत, हमारी धरोहर’’:: सीढ़ियों के निकलते ही बिहारघाट की शोभा हुई निराली

– वृन्दावन के प्राचीन घाटों की दुर्दशा से अवगत कराएगा वृन्दावन टुडे 

– तीर्थ पुरोहित परिवार की सक्रियता से बिहार घाट का हुआ है पुनर्जीवन

– वृन्दावन के प्राचीन इतिहास और महत्व समेटे इन घाटों का संरक्षण करने की कभी न सोची पुरातत्व विभाग एवं पर्यटन विभाग ने 

वृन्दावन, 20 अगस्त 2017,(VT) हम बात कर रहें है यमुना किनारे बने प्राचीन बिहार घाट की, जो कि आध्यात्मिक पुस्तकों के अध्ध्यन से भान होता है यह घाट लगभग 500 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। इस घाट की सुंदरता हमें एक प्राचीन धरोहर का भी दर्शन कराती हैं।

सुप्रसिद्ध रासस्थली टोपी कुंज से निकलकर जब हम परिक्रमा मार्ग यमुना किनारे आएंगे तो हमें इस प्राचीन बिहार घाट सुखद दर्शन होगा है। जो कि प्रशासनिक अनदेखी के चलते कूड़े एवं मलबे के ढेर में तब्दील हो गया था, यह धरोहर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही थी। गंदगी एवं कूंड़े से अटे पड़े इन घाटों की किसी ने सुध लेना उचित नहीं समझी थी।

विकास के नाम पर तत्कालीन प्रदेश सरकारों ने यमुना संचरण क्षेत्र में एक बार, दो बार नहीं अपितु तीन बार सीवर लाइनें बिछवाई व इस क्षेत्र के गंदे पानी के निकास के लिए एक बड़ा नाला घाट की सीढ़ियों के ठीक सामने से और एक सड़क का निर्माण तक करा दिया, प्राचीन धरोहरों को पूरी तरह नेस्तनांबूत करने एवं यमुना खादर की भूमि को अवैध रूप से क्रय-विक्रय के लालच में कोई कोर कसर नहीं थी, देश के माननीय न्यायालय बार-बार प्राचीनता की रक्षा के लिए समय-समय पर चेतावनी देते रहे हैं, लेकिन यहां पर विकास के नाम पर प्राचीन धरोहरों की आवाज दबाई जा रही है।

लेकिन तीर्थ पुरोहित परिवार की सक्रियता के चलते एक प्राचीन घाट अपने पुरातन स्वरूप में धीरे-धीरे वापस आने लगा हैं, कई महीनों की कड़ी मशक्कत के बाद तीर्थ पुरोहित परिवार के मुखिया श्रीसंजय वल्लभ गौतम के नेतृत्व में ब्रजवासी भक्त वृन्दावन प्रेमियों ने मिलकर इस 500 वर्ष प्राचीन घाट को कूड़े एवं मलबे के ढेर से लगभग 26 सीढ़ियां एवं प्राचीन घाट को निकालकर ऐतिहासिक कार्य कर दिखाया। इस घाट पर श्रीगिरिराज महाराज की प्राचीन शिला का अपना एक विशिष्ट इतिहास हैं, सायंकाल आरती के समय स्थानीय भक्तजनों एवं आने वाले तीर्थयात्रियों की उमड़ती संख्या इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आज भी लोगों को अपनी प्राचीन धरोहरों से कितना लगाव है। यमुना किनारे बसे प्राचीन घाट से नब्बे के दशक में यमुना कल-कल, अविरल बहती थी, समय बदला, यमुना की अनदेखी हुई।

अधिकारियों एवं भूमाफियाओं की मिलीभगत से यहां यमुनाजी के विचरण क्षेत्र में काॅलोनियों कट गई, प्रशासनिक अनदेखी के चलते अतिक्रमण इतना होता चला गया कि आज हमारी यमुना जी और प्राचीन घाट उनके सामने बौने नजर आते है।  ब्रज वृन्दावन के प्राचीन इतिहास और महत्व को समेटे इन घाटों का संरक्षण करने की जरूरत न तो पुरातत्व विभाग और न ही पर्यटन विभाग ने उचित समझी।

इन्होंने कराया था बिहार घाट का निर्माण

पौराणिक महत्व के इस घाट का निर्माण दक्षिण भारत के विप्र आपराम ने करवाया था, छतरीदार बुर्जिया, पृथ्वी तल पर छोटा मंदिर, घाट की ऐतिहासिक सुंदर सीढ़ियां इस प्राचीन घाट का दर्शन कराती है।

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