बिना अनुमति 477 पेड़ काटे, एनजीटी ने लगाया 116 लाख रूपये का जुर्माना

– 477 पेड़ काटे गए हैं, इसकी जगह 4,777 वृक्ष लगाए वन विभाग- एनजीटी

– प्रापर्टी पर नहीं हो सकता था किसी भी प्रकार का व्यावसायिक या गैर व्यावसायिक निर्माण- एनजीटी

– पर्यावरण एवं प्रकृति का सम्मान करें, न कि छेड़छाड़ करें- एनजीटी

वृन्दावन, 03 अगस्त 2017 (VT) नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक निजी प्रापर्टी पर 477 पेड़ काटने पर 116 लाख रूपये जुर्माना लगाकर समाज को प्रकृति एवं पर्यावरण से छेड़छाड़ न करने का एक सख्त संदेश भी दिया है।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक निजी प्रापर्टी को अवैध रूप से बेचा गया, जबकि प्रापर्टी पर किसी भी प्रकार का स्थायी-अस्थायी, व्यावसायिक-गैर व्यावसायिक निर्माण नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद प्रापर्टी को गलत रूप से बेचकर 477 पेड़ काट दिए गए। जिसका 21 नवम्बर 2014 को कोर्ट के समक्ष आया, जिस पर एनजीटी ने सख्त टिप्पणी जताते हुए 477 पेड़ काटने पर 116  लाख रूपये का जुर्माना लगाया है।

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि बिना अनुमति के 477 से अधिक देवदार और ओक जैसे कीमती पेड़ों को बड़ी बेरहमी से काटा गया हैं, इस पर कोर्ट ने सख्त रूप अख्तियार किया है। एनजीटी इसके साथ ही वनविभाग को आदेश दिया कि 477 पेड़ के बदले संबंधित प्रापर्टी पर 4,777 पेड़ लगवाए, जिससे कि समाज को पर्यावरण की दिशा में एक नया संदेश भी मिल सकें एवं व्यक्ति पर्यावरण एवं वृक्षों के प्रति सचेत रह सकें।

पीठ ने सूबे के प्रधान वन संरक्षक से इस आदेश के पालन को लेकर पहली रिपोर्ट 16 सितंबर को मांगी है। DS

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