नगर निगम मामले में हाईकोर्ट ने चार हफ्ते में राज्य सरकार से मांगा जवाब

150 वर्ष पुरानी वृंदावन एवं मथुरा पालिका दोनों को भंग कर निगम बनाना असंवैधानिक
वृन्दावन, 03 अगस्त 2017(VT) 150 वर्ष प्राचीन नगरपालिका वृन्दावन और मथुरा को भंग कर राज्य सरकार द्वारा मथुरा नगर निगम घोषित किया गया। निगम से वृन्दावन को अलग नगरपालिका रहने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में महंत मधुमंगल शरण दास शुक्ल ने याचिका 18 जुलाई को दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मामले में अग्रिम तारीख 1 अगस्त दी थी, किन्हीं कारणों से 1 अगस्त पर सुनवाई न होने के बाद 2 अगस्त को सीजे कोर्ट में सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीबी भौंसले और जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने वृन्दावन की संस्कृति, प्राचीनता, धरोहरों का समझते हुए वृन्दावन के प्राचीन स्वरूप की रक्षार्थ इस मामले में राज्य सरकार को चार हफ्ते का समय देकर जवाब मांगा है।
महंत के वकील अनिरूद्ध चतुर्वेदी ने अपना पक्ष रखते हुए मथुरा और वृंदावन दोनों नगरों की प्राचीन संस्कृतियों और इतिहास अलग-अलग होने का हवाला देते हुए इस फैसले का संज्ञान लेने की मांग की। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लगभग 150 वर्ष पुरानी वृंदावन नगर पालिका परिषद एवं मथुरा नगर पालिका परिषद दोनों को भंग कर नगर निगम बनाना असंवैधानिक है। इन दोनों को मिलाकर मेट्रोपोलिटिन सिटी बनाने की साजिश की जा रही है। कहा गया कि यदि ऐसा हुआ तो प्राचीन संस्कृति और धरोहरों को सहेजे धर्मनगरी वृंदावन का गौरवमयी इतिहास हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को इस संबंध में चार हफ्ते का समय देते हुए अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 30 अगस्त को होगी।DS

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