सावन सोमवार पर विशेष: महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने प्रथम बार शिवलिंग के प्रतीक चिह्न को सिक्कों पर कराया अंकित

ब्रज संस्कृति शोध संस्थान,वृन्दावन में संग्रहीत यह दुर्लभ चाँदी का रुपया इंदौर की प्रसिद्ध महारानी अहिल्या बाई होल्कर ( सन् 1765 ई० – सन् 1795 ई० ) का है,

वृन्दावन, 17.07.2017 (V.T.) ब्रज संस्कृति शोध संस्थान,वृन्दावन में संग्रहीत यह दुर्लभ चाँदी का रुपया इंदौर की प्रसिद्ध महारानी अहिल्या बाई होल्कर ( सन् 1765 ई० – सन् 1795 ई० ) का है, जिस की विशेषता यह है कि रुपया तो तत्कालीन परम्परा के अनुसार मुगल बादशाह के नाम पर ही फारसी अभिलेख के साथ जारी किया गया है, परन्तु महारानी ने टकसाल चिह्न के रूप में रुपया के अग्रभाग के मध्य में शिवलिंग व किनारे पर विल्व पत्र की सुन्दर आकृतियाँ अंकित की हैं, जो महारानी के परम शिव भक्त होने का जीवन्त प्रमाण हैं।

 

ब्रज सांस्कृति शोध संस्थान के सचिव एवं इतिहारकार लक्ष्मीनारायण तिवारी जी

ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव एवं इतिहासकार डा.लक्ष्मीनारायण तिवारी ने कहा कि सम्पूर्ण भारतीय सिक्कों के इतिहास में शिवलिंग के प्रतीक चिह्न को सिक्कों पर प्रथम बार अंकित करने का श्रेय महारानी अहिल्या बाई होल्कर को ही जाता है।

महारानी की गणना आदर्श शासकों में की जाती है। उन्होंने भारत के विभिन्न तीर्थों में अनेक मन्दिरों, धर्मशालाओं व अन्नक्षेत्रों का निर्माण कराया।

इसी क्रम में महारानी ने वृन्दावन में भी चीर घाट स्थित होल्कर कुंज व मन्दिर का निर्माण कराया तथा मथुरा – वृन्दावन मार्ग के मध्य में ‘अहिल्या गंज’ नाम से एक छोटा गाँव भी वसाया था, यह गाँव आज भी है। यह सभी निर्माण कार्य उस महान महिला की अमर कीर्ति का यशोगान आज भी कर रहे हैं। (D.S)

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