सावन के सोमवार पर विशेष:  कुषाण ताम्र मुद्रा में शिव का दुलर्भ संपूर्ण पौराणिक स्वरूप

ब्रज संस्कृति शोध संस्थान, वृन्दावन में संग्रहीत कुषाण राजा विम कडफिसस की दुर्लभ ताम्रमुद्रा ।
( प्रथम शताब्दी ईस्वी ) यह मुद्रा वृन्दावन में यमुना नदी की रेती से प्राप्त हुई जिस पर एक ओर नन्दी के साथ भगवान शिव का अंकन पूर्णतः पौराणिक स्वरूप में है और चारों ओर खरोष्ठी लेख अंकित है ।
दूसरी ओर राजा विम यज्ञ की आहुति देते हुए अंकित है तथा चारों ओर यूनानी लेख अंकित है ।

 

वृन्दावन, 16.07.2017 (V.T.) : यह दुर्लभ्र ताम्रमुद्रा महान कुषाण शासक राजा विम कडफिसस की है। जो आजकल ब्रज संस्कृति शोध संस्थान, वृन्दावन में संग्रहीत है। इस ताम्रमुद्रा के अग्र भाग पर नन्दी सहित भगवान शिव संपूर्ण पौराणिक स्वरूप में अंकित हैं और चारों ओर खरोष्ठी लिपि में अभिलेख अंकित हैं। दूसरी ओर कुषाण राजा विम की आकृति अंकित हैं, जो यज्ञ वेदी में आहूति डालते हुए प्रदर्शित की गई हैं और चारों ओर यूनानी लिपि में अभिलेख अंकित हैं।

यह ताम्रमुद्रा उन कुषाण शासकों की है, जिन्होंने प्रथम शताब्दी की इ्र्रस्वीं के लगभग मथुरा पर राज्य किया था। कुषाण साम्राज्य में मथुरा की उन्नति व कीर्ति अपने चरम शिखर पर पहुँच गई थी। उस साम्राज्य के पुरातात्विक अवशेष मथुरा एवं उसके आसपास के क्षेत्रों से आज भी प्राप्त होते रहते हैं। कुषाणकालीन मूर्ति शिल्पों का एक बड़ा भंडार राजकीय संग्रहालय, मथुरा में देखा जा सकता है। संग्रहालय की रिपोर्ट के अनुसार मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में पुरातात्विक उत्खननों के दौरान कुषाणकालीन सिक्के सर्वाधिक प्राप्त होते हैं। भूतेश्वर, गोविंद नगर एवं मांट से कुषाण सिक्कों की प्रसिद्ध निधियाँ प्राप्त हुई हैं।

 

 

 

ब्रज सांस्कृति शोध संस्थान के सचिव एवं इतिहारकार लक्ष्मीनारायण तिवारी जी

यह सिक्का इसलिए विशेष है, क्योंकि यह वृन्दावन में यमुना की रेती से जिस नाविक को प्राप्त हुआ था, उसने यह सिक्का ब्रज सांस्कृति शोध संस्थान के सचिव एवं इतिहारकार लक्ष्मीनारायण तिवारी जी को भेंट स्वरूप प्रदान कर दिया और अब यह सिक्का ब्रज संस्कृति शोध संस्थान, वृन्दावन में अध्येताओं के संरक्षित है।
यदि हम प्राचीन भारतीय सिक्कों पर शोध की दृष्टि डालते हैं, तो हम पाते हैं कि कुषाणों के सिक्के ही वह सिक्के हैं, जिन पर संपूर्ण पौराणिक रूप में भगवान शिव को अंकित किया गया है। यह सिक्के बताते हैं कि किस तरह से कुषाणों ने न केवल भारतीय संस्कृति को अपनाया, अपितु भारतीय देवताओं को भी आत्मसात् किया। यह राजा विम के भगवान शिव का उपासक होने का भी जीवंत प्रमाण है।

एक उत्तर दें छोड़ दो

Your email address will not be published. Required fields are marked *