दूर होंगी ब्रज चैरासी कोस परिक्रमा की तकलीफें

बजट में गोवर्धन, वृंदावन के विकास के लिए वृहद योजनाएं की गई प्रस्तावित
राजस्थान सरकार ने भी पास किया 200 करोड़ का बजट

वृन्दावन, 12.02.2017 (V.T.) ब्रज चैरासी कोस परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालुओं की परेशानियां दूर होंगी।
बजट में गोवर्धन, वृंदावन के विकास के लिए प्रस्तावित की गई वृहद योजना में ब्रज चैरासी कोस परिक्रमा के विकास को भी शामिल किया गया है। इससे ब्रज यात्र के मार्गों की सूरत बदल जाएगी।
भादो में शुरू होने वाली परिक्रमा में देश के कोने कोने से श्रद्धालु शामिल होते हैं। कई जगह परिक्रमा का मार्ग कच्चा है। बारिश होने से यात्रियों को बहुत परेशानी होती है लेकिन अब उनके लिए लाड़िली लाल की लीला स्थलियों के दर्शन सुगम हो जाएंगे।
परिक्रमा का अस्सी फीसद हिस्सा मथुरा की सीमा हैं, जबकि शेष राजस्थान और हरियाणा में हैं। इसमें 18 पड़ाव स्थल हैं। ब्रज चैरासी कोस परिक्रमा मथुरा से शुरू होकर सबसे पहले भक्त ध्रुव की तपोस्थली मधुवन पहुंचती है। यहां पर परिक्रमार्थियों का पड़ाव स्थल है। पर्यटन विभाग ने पूर्व में इसका निर्माण कराया था। इसके अलावा वृंदावन और सेही बछवन में पड़ाव स्थल विकसित कराए गए हैं। शेष परिक्रमा मार्ग में कहीं कोई पड़ाव स्थल नहीं बनाया गया है। महोली से तालवन, कुमुदवन तक श्रद्धालुओं को कच्चे और जर्जर मार्गों से होकर परिक्रमा करनी पड़ती है। उनके ठहरने के लिए स्थान भी नहीं हैं। यहां तक न लाइट के इंतजाम है और न ही शौचालयों की व्यवस्था अभी तक परिक्रमा मार्ग में हो पाई हैं। पेयजल के लिए भी परिक्रमार्थियों को ब्रज चैरासी कोस यात्र के साथ चलने वाले पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। पड़ाव स्थल के लिए यात्रा को ग्रामीणों से किराए की जमीन लेनी पड़ रही है। वृंदावन, महोली और सेही बछवन को छोड़कर अन्य पड़ाव स्थलों पर यात्रियों के ठहरने के लिए कोई सरकारी जमीन भी नहीं हैं। बजट में ब्रज चैरासी कोस परिक्रमा मार्ग को शामिल किए जाने से ब्रज के विकास की नई उम्मीदें की किरणों फूटी हैं। बजट में चैरासी कोस परिक्रमा की योजना को शामिल किया गया है।
सुनील सिंह के अनुसार राजस्थान सरकार ने ब्रज यात्रा के राजस्थान में पड़ने वाले स्थलों के विकास के लिए 200 करोड़ का बजट पास किया है। 183 करोड़ का ठेका भी उठ चुका है। यात्र मार्ग को चैड़ा किया जाएगा, कच्ची, पक्की सड़क बनाई जाएंगी। परिक्रमा मार्ग में करीब 40 हजार पेड़ लगेंगे। राजस्थान में ब्रज यात्र के करीब 25 गांव आते हैं।

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दूर होंगी यात्रियों की असुविधाएं 

मान मंदिर सेवा संस्थान द्वारा कराई जाने वाली निश्शुल्क ब्रज यात्र में करीब आठ-नौ हजार श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसके सचिव सुनील सिंह ने बताया कि इस यात्र में देश विदेश के कृष्ण भक्त आते हैं। यह काम तो बहुत साल पहले हो जाना चाहिए था। अब हुआ है, ये सौभाग्य की बात है। यात्र में सबसे बड़ी दिक्कत पड़ावों की है। खेतों के हिस्से होने की वजह से जगह की कमी हो गई है। बड़ी यात्र के लिए करीब 30 एकड़ जमीन चाहिए। रास्ते की भी समस्या है। उम्मीद है कि अब ये सभी समस्याएं दूर होंगी। 1ये हैं ब्रज चैरासी कोस के प्रमुख स्थलरू भक्त ध्रुव तपोस्थली, मधुवन, तालवन, कुमुदवन, महावन, काम्यवन, भांडीरवन, बेलवन, शांतनु कुंड, सतोहा, बहुलावन, राधा-कृष्ण कुंड, गोवर्धन, चंद सरोवर, जतीपुरा, डीग का लक्ष्मण मंदिर, साक्षी गोपाल मंदिर, जल महल, चरन पहाड़ी, बरसाना, नंदगांव, जावट, कोकिलावन, कोसी, शेरगढ़, चीर घाट, नौहझील, भद्रवन, गोपाल कुंउ, कबीर कुंड, भोयी कुंड, ग्राम पडरारी के वनखंडी में शिव मंदिर, दाऊजी, महावन, ब्रह्मांड घाट, चिंताहरण महादेव,गोकुल, लोहवन और वृंदावन के तमाम पौराणिक स्थल भी परिक्रमा मार्ग में ही हैं। (DS)

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