डीपीआर बिना बन रहा रिवर फ्रंट

योगी सरकार भी अपने अफसरों से नहीं ले पा रही काम 

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वृंदावनए 16 जुलाई 2017 (V.T.) अखिलेश सरकार के समय से शुरू ड्रीम प्रोजेक्ट यमुना रिवर फ्रंट को योगी सरकार भी अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बना बैठी है। सपा सरकार के साथ योगी सरकार भी बिना डीपीआर बनाये इस रिवर फं्रट को पूरा करना चाहती है। जहां तक कि योगी सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने में खास रूचि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने दिखाई हैंए लेकिन उन्होंने भी प्रशासनिक अफसरों से डीपीआर मांगने की भी जहमत नहीं उठाई है।

चैंकाने वाली बात यह है कि एनजीटी बार.बार डीपीआर मांग रहा है और रिवर फ्रंट को बनाने में रुचि दिखा रही योगी सरकार इस बाबत अफसरों से काम नहीं करा पा रही। पिछले साल फरवरी में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वृंदावन में यमुना किनारे सुंदरीकरण के लिए घाट निर्माण को 180 करोड़ रुपये लागत की रिवर फ्रंट योजना की घोषणा की थी। इसे पूरा करने के जिम्मेदार सिंचाई विभाग ने पिछले साल जून में काम शुरू कर दिया। मगर यमुना में जलस्तर बढ़ने और इसके बाद एनजीटी और हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद काम पर रोक लग गई। दो महीने पहले 18 मई को एनजीटी ने मामले में सुनवाई करते हुए कार्यदायी संस्था को सीट पाइलिंग की अनुमति देते हुए 13 जुलाई को प्रोजेक्ट की डीपीआर पेश करने के आदेश दिए थेए जो अभी तक तैयार नहीं की गई है।

डीपीआर की बात पर एक दूसरे पर झूल टालते दिखे अफसर

डीपीआर के मामले में सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता एनसी उपाध्याय का कहना है कि उन्हें पता नहीं है कि डीपीआर तैयार हुई या नहीं। अधिशासी अभियंता से पूछेंगे। इस पर विभागीय खींचतान जोरों पर है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रजनीकांत शर्मा ने बताया कि जल निगम को डीपीआर तैयार करने को दी गई थी। जल निगम के अफसरों का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा डीपीआर बनवाने की तय धनराशि जमा नहीं की गई हैए इसलिए डीपीआर तैयार नहीं हुई।

 

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