वन के नाम से प्रसिद्ध शहर में वृक्षारोपण के लिए बचा नहीं स्थान

वृन्दावन, 2017. 07.16 (VT):  वृन्दावन एक ऐसा नगर है जिसके नाम के साथ वन जुड़ा हो। वृन्दावन के कुन्ज – निकुंजों का शास्त्रों में अनेकों वर्णन है। लेकिन अब यहां वृक्ष दिखते हीे नहीं है। जो भी थे वे वृक्ष सरकार के विकासवादी परियोजनाओं एवं काॅलौनाइजरों के भेंट चढ़ गयी।                                                                                                                           एक समय वृन्दावन बाग बगीचों से भरा हुआ था। जिसका प्रमाण यह है कि यहां के मौहल्लौं के नाम के साथ बाग जुड़ा है। जैसा कि गोविन्द बाग, गोपीनाथ बाग, राधा बाग, गोपाल बाग आदि। गोविन्द बाग ठा. गोविन्द देव जी का बगीचा हुआ करता था, वहीं गोपीनाथ बाग में ठा. गोपीनाथ जी का बगीचा था। निधिवन एवं सेवा कुंज का विस्तार बहुत बड़ा था। लेकिन समय के साथ साथ बाग बगीचे समाप्त होते चले गये, और उसके स्थान पर कंक्रीट के भवन खड़े हो गये। वृन्दावन में जमीनों की मांग में उछाल के साथ बाग बगीचे खत्म कर दिये गये, तथा उसके स्थान पर बहुमंजिली इमारत बना दिए गये।
वृन्दावन के आधुनिक विकास के लिए हरियाली का कोई स्थान नहीं। पंचकोसी परिक्रमा के अन्दर मूल वृन्दावन मे वृक्ष लगाने तक की जगह उपलब्ध नहीं है। अगर कुछ बाग बगीचे बचे भी हैं तो वहां सर्वसाधारण को आसानी से घुसने नहीं दिया जाता। बिहारी जी का बगीचा, रंग जी का बगीचा, मदन टेर, ललिता बाग और कुछ अन्य बगीचे बचे हैं जहां थोड़ी बहुत हरियाली बची है। वृन्दावन सीमा क्षेत्र के बाहर अक्रूर के जंगल जिसमें पारंपरिक वृक्ष के स्थान पर बबूल के वृक्ष ज्यादा है। दूसरी ओर सुनरख वन जहां कुछ वर्ष पूर्व वृक्षारोपण किया गया था, लेकिन वहां भी बहुत ज्यादा पेड़ नहीं बचे।
वृन्दावन का इससे ज्यादा दुर्भाग्य क्या हो सकता है जब सरकारी सूत्र यह बोले कि वृन्दावन में वृ़क्ष लगाने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है। वन विभाग के सूत्रों की मानें तो वृन्दावन में नए पेड़ लगाने को वन भूमि नहीं है। इसके कारण इस बार वन विभाग एक भी नया पौधा नहीं लगाएगा। वृन्दावन क्षेत्र में सिर्फ पुराने नष्ट हुए पौधे के स्थान पर पौधे लगाने का कार्य ही हो सकेगा।
तीन ओर से यमुना से घिरे वृन्दावन में तेजी से बन संपदा नष्ट हुई और उनके स्थान पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गई। दुर्भाग्य है कि वृन्दावन में अब पौधारोपण करने को वन विभाग के पास जमीन नहीं बची।
जहां प्रदेशभर में बारिश के मौसम से लाखों नवीन पौधा लगाए जाएंगे। वहीं नगर में इस बार एक भी नया पौधा वनविभाग नहीं लगाएगा। नवीन पौधारोपण नहीं लगाने की पूर्ती के लिए वन विभाग इस बार बारिश में बीटिंग अप (पुराने नष्ट हुए पौधे के स्थान पर पौधे लगाने का कार्य) करेगा। वन विभाग ने अहिल्यागंज व धौरेंरा क्षेत्र में जो वन विभाग की भूमि है। उसमें मरे पौधे लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। अहिल्यागंज वन क्षेत्र में 3000 धैरेरा वन क्षेत्र में चार हजार पौधे बदले जा रहा है। मखदूम बकरी अनुसंधान क्षेत्र में 64 हजार नए पौधे लगाए जा रहे है। यह कार्य एक जुलाई से शुरू हो गया है।
वन विभाग के रेंजर श्री मुकेश मीणा ने बताया कि वृन्दावन क्षेत्र में पौधा लगाने को जमीन नहीं मिल रही। जहां पौधे लगाने के लिए वन विभाग की जमीन थी। वहां पहले ही पौधे लग चुके हैं। इसलिए इस वर्ष वृन्दावन क्षेत्र में नवीन पौधे नहीं लगाए जा रहे है। यहां सिर्फ बीटिंग अप का कार्य किया जा रहा है। (MS)

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