159 कारखाने यमुना में घोल रहे जहर

                                                                                     -नियमों को ताक पर रख आधे से ज्यादा हो रहे संचालित

वृन्दावन, 2017.06.13 (VT): ब्रज में यमुना के जल को दूषित होने का इल्जाम दिल्ली, एनसीआर के कारखानों पर लगाया जाता रहा है, मगर मथुरा में भी डेढ़ सौ से ज्यादा कारखाने यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं। इसका खुलासा एक आरटीआइ में हुआ।

अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने लखनऊ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आरटीआइ के जरिए जो जानकारी हासिल की है, उसके अनुसार जिले में यमुना किनारे स्थापित 159 कारखानों का रासायनिक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। एक साल पहले तक 116 इंडस्ट्री चालू हालत में थी, जबकि 43 बंद पड़ी हैं। मगर, यमुना शुद्धिकरण और सुंदरीकरण की योजना बना रही उप्र सरकार और अफसर अगर इन इंडस्ट्रीज के रसायनिक अवशेष को यमुना में डिस्चार्ज होने से रोक दें तो भी यमुना का काफी शुद्ध पानी मथुरा और वृंदावन को मिल सकता है।

मथुरा की सीमा में बह रही यमुना में टेनरी, मेटल, टेक्सटाइल प्रोसिसिंग, आयल रिफाइनरी, पेट्रो केमिकल जैसी इंडस्ट्रीज का दूषित जल डिस्चार्ज हो रहा है। नियमों की भी हो रही अनदेखी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ से मिली जानकारी के अनुसार इन इंडस्ट्रीज में 57 नियम के अनुसार चल रही हैं, जबकि 17 इंड्रस्ट्री किसी भी नियमों को पूरा नहीं कर रही। 76 इंडस्ट्रीज का सरकारी विभागों में कोई आंकड़ा नहीं है और 9 इंडस्ट्री एप्लीकेबल ही नहीं हैं।

केवल पांच एसटीपी मथुरा और वृंदावन के बीच संचालित हैं। इनमें से ट्रांस यमुना एसटीपी पर 16 एमएलडी, पागल बाबा मंदिर के पास वृंदावन में 4 एमएलडी, सौ शैय्या अस्पताल के पास बने नए एसटीपी पर 8 एमएलडी, मसानी एसटीपी में 13.55 एमएलडी और ट्रांस यमुना ओल्ड एसटीपी से 14.5 एमएलडी प्रदूषित जल का ही शोधन हो रहा है। जबकि इससे कई गुना ज्यादा रासायनिक कचरा उद्योगों से निकल रहा है। (DS)

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