प्रियाकान्तजू पाटोत्सव पर भजन संध्या में गूजें भक्ति के स्वर

वृन्दावन, 2017.01.24 (VT): ठाकुर प्रियाकान्तजू भगवान के प्रथम पाटोत्सव पर भक्त देर सांय तक खुशियाॅं मनाते रहे । संत सम्मेलन के बाद शांति सेवा सभागार में मंगलवार साँय देवकीनंदन महाराज के आशीर्वचन एवं भजन संध्या आजोजित की गयी । इससे पूर्व प्रथम पाटोत्सव पर विभिन्न स्थानों से आये भक्तों ने प्रियाकान्तजू मंदिर पर आरती में भाग लिया । मंदिर पर एकत्रित हुये श्रद्धालु भक्तों ने पिछले वर्ष मंदिर लोकार्पण पर आयोजित श्रीप्रियाकान्तजू दिव्य दर्शन महोत्सव की यादों को ताजा किया ।_70B7007
वृन्दावन-छटीकरा मार्ग स्थित श्रीप्रियाकान्तजू मंदिर पर मंगलवार को भक्त अपने अराध्य के पाटोत्सव पर मंगलगीत गाते रहे । सांय 6 बजे शुरू हुये सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रसिद्ध भजन गायक कैलाश अनुज एवं पीयूषा जी ने अपनी मधुर आवाज में कृष्ण भजनों से भक्तों को झूमने पर विविश कर दिया । रात श्याम सपने में आये…….., मेरो गिरधर गोपाल….., पायो जी मैने राम रतन धन पायो………….. जैसे भजनों पर भक्तों ने खूब नृत्य किया ।  वृन्दावन के बनवारी लाल महाराज ने भी श्रोताओं को भजनों से आनंदित किया । भक्ति संगीत का यह कार्यक्रम देर तक भक्तों को बांधे रहा ।
_70B7171इससे पूर्व देवकीनंदन महाराज ने अपने आशीर्वचनों में भक्ति और धर्म को जीवन के लिये आवश्यक बताते हुये कहा कि इस कलियुग में नामोच्चारण भक्ति से ही प्रभु की प्राप्ति हो जाती है । उन्होने कहा कि संतों के सानिध्य के अलावा अगर ईश्वरीय संकेतों को अनुभव करना हो तो माता के प्रेम और पिता की डाँट में उनके दर्शन होते हैं । धर्म और अधर्म की परिभाषा बताते हुये उन्होने कहा कि जो धारण करने योग्य है वह धर्म है और जो त्यागने लायक है वो अधर्म है । कहा कि सनातन धर्म वह वृक्ष है जिसकी छाँव पूरे विश्व को शीतलता, समानता और परोपकार की शिक्षा देती है। इस परम्परा को बचाये रखने के लिये जरूरी है कि हम अपने बच्चों को अपने धर्म और भगवद् भक्ति के प्रति जागरूक करें ।
पाटोत्सव के दूसरे दिन प्रातः प्रियाकान्तजू मंदिर पर टटिया स्थान के संतगायकों ने पद गायन किया । इस मौके पर विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के सचिव विजय शर्मा, ट्रस्टी एच.पी. अग्रवाल, श्यामसुन्दर शर्मा, रवि रावत, चन्द्रप्रकाश शर्मा, इंदे्रेश मिश्रा आदि उपस्थित थे ।

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