धीरे-समीरे यमुना तीरे, बसति बने वनवाली……

_mgl8331वृन्दावन,  2016.10.14 (VT): जयसिंह घेरा स्थित गंभीरा में श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु की 500वीं जयंती श्रृंखला के अन्तर्गत श्रीचैतन्य प्रेम संस्थान के तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय संकीर्तनोत्सव में ’’कीर्तनीय सदाहरि’’ नामक नृत्य नाटिका पर सुप्रसिद्ध भारतनाट्यम नृत्यांगना पद्मश्री गीता चंद्रन, उनकी पुत्री शरण्या चंद्रन एवं स्नेह चक्रधर सहित नाट्यवृक्ष डांस कम्पनी की नृत्यांगनों ने भारतनाट्यम शैली में ऐतिहासिक प्रस्तुत दी।
जिसमें उन्होंने सर्वप्रथम दक्षिण भारत में प्रसिद्ध मल्हारी संगीत, ’’आलि म्हाने वृन्दावन नीकौ, घर-घर तुलसी ठाकुर सेवा दर्शन गोविन्द जी कौ’’……, श्री जयदेव जी के गीत गोविन्द में ’’धीरे-समीरे यमुना तीरे, बसति बने वनवाली’’…… , ’’खेलत रास रसिक ब्रजमण्डन, मधुर-मधुर मुरली गुन बाजैं’’, ’’कंचन बेल बनी ब्रजमाला’’…., ’’श्रीहित हरिवंश मगन बन श्यामा, राधारमण सकल सुख धामा’’…… आदि पदाविलयों पर भारतनाट्यम शैली में मनोहारि नृत्य प्रस्तुत किया, अन्त में नृत्यांगनाओं ने श्रीकृष्ण_mgl9231 चैतन्य महाप्रभु के शिक्षाष्टक में ’’नधनम् नजनम् न सुन्दरीम्, कविताम् बा जगदीश’’, ’’काममे मम जनमनि जनमनिश्वरे, भवताद भक्ति रहैतुकी त्वै’’। नृत्यांगनों द्वारा प्रस्तुत मनोहारि नृत्य को देख दर्शक एवं श्रद्धालु करतल ध्वनि करते हुए अभिभूत हो गए।
अपने संबोधन में आध्यात्मिक गुरू श्री श्रीवत्स गोस्वामी ने कहा कि श्रीचैतन्य महाप्रभु को संकीर्तन का पितामह मानते थे। मानव के उद्धार हेतु भगवत् नाम संकीर्तन सर्वोपरि साधन के रूप में स्थापित है। ’’हरे कृष्ण’’ महामन्त्र की प्रतिष्ठा श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु ने साकार की। महाप्रभु की शिक्षा हमें शिक्षाष्टक के रूप में प्राप्त होती है।
इस अवसर पर जगद्गुरू पुरूषोत्तम गोस्वामी, आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी, अभिनव गोस्वामी, सुवर्ण गोस्वामी, राधाकृष्ण पाठक, उदयन शर्मा, तमालकृष्ण दास, आचार्य नरेश नारायण, दामोदर शास्त्री, जगन्नाथ पोद्दार, धनंजय गौतम, जुगलकिशोर शर्मा, अंजलि स्याल आदि उपस्थित थे। अन्त में भागवत प्रवक्ता प्रेमधन लालन जी महाराज ने शाॅल ओढ़ाकर सभी नृत्यांगनों एवं कलाकारों का सम्मान किया।

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