संगीत शिरोमणि रसिक स्वामी हरिदास

 

 

download vt4
वृन्दावन टुडे,2014.09.01(वीटी) :स्वामी हरिदास जितने रसिक भक्त थे उतने ही महान संगीतकार भी थै। उन्हे सर्वाधिक ख्याति संगीत के क्षेत्र में मिली। संगीतज्ञों के दो वर्ग होते है- एक वह जो संगीत को साधन मानकर इसकी सहायता से भैतिक सुखों की अनुभूति करते है, दूसरा वह जो संगीत को साध्य मानकर इसके द्वारा अपने आराध्य से तादात्म्य स्थापित कर लेता है। श्री स्वामी हरिदास जी भी इसी दूसरी कोटी के संगीतज्ञ थे। उनके लिए साध्य संगीत और आराध्य(श्यामा कुंज विहारी) में कोई भेद नहीं था। उनका आराध्य तो साध्य से उसी प्रकार सुशोभित होता है। जैसे आत्मा शरीर से। उनका एक पद है-
रुचि के प्रकाश परस्पर खेलन लागे

राग-रागिनी आलौकिक उपजत
नृत्य संगीत अलग लाग लागे
राग ही में रंग रह्यों रंग के समुद्र में दोऊ झागे
श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंज विहारी पे रंग रह्यो रंग ही में पागे

 

images vt6
स्वामी हरिदास की प्रकृति के अंग अंग से संगीत के आकर्षण फूटते दिखाई देते है। श्री बांके विहारी जी संगीत के आकर्षण का लोभ देते हुए वह कहते है कि
राधे  चल री हरि बोलत कोकिला अलापत
 सुर  देत पंछी, राग बन्यौ
थ्जसके संगीत में ऐसी भव्यता रही हो वह संगीत का कितना बडा साधक रहा होगा गायन वादन और नृत्य तीनों का समवेत नाम संगीत है।स्वामी जी तीनो ही विधाओं के आचार्य है। गायन के क्षेत्र में स्वामी जी की विशेष ख्याती है। भारत का कोई भी घराना ऐसा नहीं है जिसकी परम्पार में स्वामी जी की गायकी का तत्व न हो। स्वामी जी ध्रुपद और धमाल के सम्राट थे। स्वामी जी की संगीत साधना का प्रचार प्रसार श्री बाकें विहारी मंदिर के सेवायत एवं पूर्व में आयोजित स्वामी हरिदास संगीत समारोह के संस्थापक आचार्य श्री गोपाल गोस्वामी ने विगत अनेक वर्षो तक किया उनके द्वारा आयोजित इस समारोह में देश के अनेक संगीतकारों ने इस भूमि पर आकर स्वामी जी को अपनी भावांजलि दी।
आचार्य सुनील गोस्वामी

एक उत्तर दें छोड़ दो

Your email address will not be published. Required fields are marked *