संगीतज्ञों के हुनर से झंकृत हुई बांकेबिहारी की धरती

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जागरण संवाददाता, मथुरा (वृंदावन): धु्रपद के जनक स्वामी हरिदास के आविर्भाव पर मशहूर संगीतज्ञों ने अपनी साधना से बांकेबिहारी की धरती को झंकृत कर दिया। संगीत के इस महासंगम में सितार और सीयलो की जुगलबंदी से संगीत प्रेमी झूमे। कलाकारों की कथक प्रस्तुति और अभिनय नृत्य ने दर्शकों को बार-बार तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।

फोगला आश्रम में मंगलवार को शाम ढले शुरू हुआ संगीत का यह संगम भोर की किरण तक चला और संगीत प्रेमी रातभर कलाकारों की समधुर स्वर लहरियों पर एकाग्रचित्त नजर आये। स्वामी हरिदास नृत्य अकादमी के बैनरतले आयोजित दो दिवसीय स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव के दूसरे दिन सुर लहरियों की गूंज दूर तक सुनाई दी, तो झूमते दिखायी दिये संगीत प्रेमी। महोत्सव का उद्घाटन करने पहुंची मशहूर सिनेतारिका नगमा ने कहा, इस मंच पर प्रस्तुति देकर जो अनुभूति पिछले दिनों हुई उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती।

 

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उद्घाटन के बाद आरंभ हुई सुर, ताल और लय की जुगलबंदी ने संगीत प्रेमी जमकर जादू बिखेरा। सबसे पहले कथक नृत्य में ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ में ताल रंग और भाव रंग का दर्शन कराया पंडित अर्जुन मिश्रा और उनके शिष्यों ने। इसके बाद शुरू हुए नृत्य अभिनय, सुनीता बुद्धिराजा के लिखे नाट्य ‘प्रश्न पांचाली’ का भावपूर्ण मंचन हुआ। जिसका निर्देशन दिनेश ठाकुर ने किया, मंच पर नृत्य द्वारा द्रोपदी की व्यथा को बखूबी दर्शाया प्रीता माथुर ने।

 

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इससे पूर्व पहले दिन के आखिरी सत्र में मशहूर संगीतज्ञों में तालचक्र के माध्यम से स्वामी हरिदास को भावांजलि दी। तालचक्र में ड्रम पर अतुल रानिंगा, तबले पर विजय घाटे ने, तो बांसूरी का जादू बिखरते नजर आये राकेश चौरसिया और वोकल पर सौनक अभिषेकी ने भी कम जादू नहीं बिखेरा। विद्वान श्रीधर पार्थसारथी ने मृदंग पर अंगुलियों का जादू चलाया तो की बोर्ड पर संगीत का जादू बिखेरते नजर आये मुकुल डोंगरे ने भी दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।

हरिदास की भूमि की बात निराली: मिश्रा

बनारस घराने से संबंध रखने वाले पंडित अर्जुन मिश्रा ने कहा कि वृंदावन स्वामी हरिदास की साधना स्थली है, यह संगीतज्ञों का गुरुद्वारा है, यहां जो भी आता है बहुत कुछ लेकर ही जाता है। वे स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव में शिरकत करने आये।

कृष्ण की भूमि पर अभिनय करना सौभाग्य: प्रीता

रंगमंच कलाकार प्रीता माथुर ने कहा कि धु्रपद के जनक स्वामी हरिदास ने अपनी संगीत साधना से बांकेबिहारी का प्राकट्य किया हो ऐसी पवित्र भूमि के दर्शन मात्र से जीवन धन्य हो गया।

 

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वृंदावन में प्रस्तुति की इच्छा हुई पूरी: राव

पश्चिमी और भारतीय संस्कृति की जुगलबंदी से संगीत प्रेमियों की दिल की धड़कनें थाम देने वाले पंडित शुभेंद्र राव एवं साकिया राव ने कहा कि 12 साल पहले स्वामी हरिदास के इसी मंच पर लखनऊ में मौका मिला, तभी से वृंदावन में साधना की इच्छा जागृत हुई, जो आज पूरी हुई है।

ब्रज से पुराना नाता: अहमद-मोहम्मद

सूफी गायन में महारथ हासिल कर चुके जयपुर घराने से ताल्लुक रखने वाले अहमद हुसैन एवं मोहम्मद हुसैन ने कहा कि उनका मथुरा से पुराना नाता है, उनकी ननिहाल और पुरखे मथुरा में जन्मे, कई पीढि़यों पूर्व जयपुर चले गये। ननिहाल हालांकि मथुरा है, लेकिन आने का सौभाग्य स्वामी हरिदासजी के आशीर्वाद से प्राप्त हुआ।

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