कुंडों को देख सूख रहे पशु-पक्षियों के हलक 33

वृंदावन: गर्मी अभी अपने प्राथमिक चरण में है। मनुष्यों के साथ ही पशु-पक्षी बेहाल होने लगे हैं। नगर के कुंडों को सूखता देख पशु-पक्षियों के हलक अभी से सूखने लगे हैं। इस ओर न तो प्रशासन का ध्यान है और न ही पालिका का।

देखरेख के अभाव में अधिकांश कुंडों को लोगों ने डलाबघर के तौर पर प्रयोग करना शुरू कर दिया है। प्रशासन हरदम कुंडों को मूल स्वरूप में लाने का वादा तो करता है, लेकिन इस क्रम में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बता दें कि वृंदावन में न तो तालाब हैं और न ही पोखर। पशु-पक्षी महज यहां के कुंडों पर निर्भर हैं। वह इनके आसपास ही मंडराते रहते हैं। पर्यटन विभाग, प्रशासन और नगर पालिका की उदासीनता के चलते यह कुंड मूल स्वरूप और उददेश्य से भटकते दिख रहे हैं। कुछ संस्थाओं द्वारा नगर के एक-दो कुंड का जीर्णोद्धार करा दिया है, अधिकांश कुंड आज भी अपनी दुर्दशा पर रो रहे हैं।

मोतीझील पूरी तरह से बदहाल अवस्था में तो गोविंद कुंड की स्थिति दयनीय है।

पालिका चेयरमैन मुकेश गौतम का कहना है कि कुंडों की दशा सुधारने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। इन्हें मूल स्वरूप प्रदान करने का काम किया जायेगा।

पालिका लगायेगी प्याऊ

गर्मी में लोगों के हलक को तर करने के लिये नगरपालिका की ओर से यमुना के किनारे जगह-जगह प्याऊ लगायी जायेंगी। चेयरमैन मुकेश गौतम ने बताया कि मुनष्यों के साथ ही पशु-पक्षियों के लिये पानी की व्यवस्था की जायेगी।

पर्यटन विभाग नहीं ले रहा सुध

धर्मनगरी के कुंडों की हालत सुधारने के लिये पर्यटन विभाग के अफसर सुध नहीं ले रहे हैं। जबकि कुंडों के सुंदरीकरण और रखरखाव के बिना पर्यटकों को आकर्षित करना आसान नहीं होगा।

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