विकास की बाट जोह रहीं विरासत

गोवर्धन: जो बृज बसुंधरा में भगवान की क्रीड़ा स्थली को प्रमाणित करते हैं, आज उन्हीं का अस्तित्व खतरे में नजर आता है। उन तक पहुंचने के लिए न सुगम रास्ते हैं और न ही हिफाजत हो रही है। स्थिति ये है कि प्राचीन कुण्डों का पानी आचमन योग्य नहीं है। पौराणिक चिन्हों को नहीं बचाया गया तो बृज बसुंधरा से पौराणिक महत्व की चीजें लोप हो सकती हैं।

गोवर्धन के बीचों बीच बनी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र पतित पावनी मानसी गंगा का इतिहास बताता है कि इसको कान्हा ने बृजवासियों की इच्छा पर अपने मन से उत्पन्न किया था। अपना पौराणिक स्वरूप खोती मानसी गंगा के विकास को करीब तेईस करोड़ की योजना बनी, लेकिन योजना में भ्रष्टाचार का दीमक लग गया।

बड़ी परिक्रमा स्थित गोविंद कुंड अपने आप में धार्मिक महत्व समेटे हुये है। यह एतिहासिक विरासत विलुप्त होने के कगार पर है। कुंड की दुर्दशा मुख्यमंत्री की योजना का इंतजार कर रही है। प्रदूषित जल के कारण आस्था ने अपना रास्ता बदल दिया है। परिक्रमार्थी आचमन के नाम पर मुंह सिकोड़ते नजर आते हैं।

बड़ी परिक्रमा में पड़ने वाला सुरभि कुंड धार्मिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री और जन प्रतिनिधि गोवर्धन के धार्मिक स्थलों का विकास कराने के दावे कर रहे हैं, परंतु गिरिराज सप्तकोसीय परिक्रमा मार्ग में जतीपुरा स्थित सुरभिकुंड पर उनकी नजर नहीं है। हालत यह है कि कुंड का जल आचमन योग्य भी नहीं रह गया है। चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य है। कुंड पर प्रकाश की व्यवस्था भी नहीं है। इस महत्वपूर्ण स्थल तक पहुंचने के लिए कोई सुगम मार्ग तक नहीं बना है। स्थिति ये है कि विकास योजना की फाइलें धूल फ ांक रही हैं और विरासतें दिन प्रतिदिन अपना अस्तित्व बचाने को संघर्ष कर रही हैं। सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थली की धार्मिक विरासतों को सहेजने के लिऐ विकास की योजनाएं बनाईं। लेकिन योजनाओं पर आज तक काम शुरू नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि तलहटी की भौगोलिक स्थिति से अनभिज्ञ सूबे के मुख्यमंत्री आखिर तलहटी का विकास किस आधार पर करना चाहते हैं। जब तक विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की समिति नहीं बनाई जाएगी, तब तक योजनाएं परवान नहीं चढ़ेंगी।

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