स्वामी बाबा: मेला में मौज और कुंड में आस्था

चौमुंहा: चौमुहां के गांव तरौली में लगने वाला पांच दिवसीय स्वामी कार्तिकेय का लक्खी मेला रविवार से शुरु हो रहा है। मेला में मौज आयेगी तो कुंड में डुबकी लगाने की होड़ लगेगी। कार्तिक माह में देवोत्थान एकादशी से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलने वाले मेले को श्रद्धालु स्वामी बाबा या बूढ़े बाबा के नाम से जानते हैं। जनश्रुति है कि तारक नामक राक्षस के अत्याचारों से भयग्रस्त देवी-देवता शिव-पार्वती पुत्र स्वामी कार्तिकेय की शरण में पहुंचे। कार्तिकेय ने तारक राक्षस को मारने का दृढ़ संकल्प लिया। इधर तारक राक्षस ने कठोर तपस्या करके न मरने का वरदान प्राप्त कर लिया। स्वयं को अमर समझकर मृत्यु लोक में अत्याचार मचा रहा था। घमासान युद्ध में कार्तिकेय ने तारक का पानी के अंदर वध किया। तारक राक्षस मरने के कारण ही यहां बसे गांव का नाम तरौली पड़ा। खुदाई में स्वामी कार्तिकेय की मूर्ति निकली थी। पूर्व प्रधान पूरन सिंह, प्रधान गोकुल सिंह गौड़, प्रधान कसूतरी देवी, पूर्व प्रधान हीरो देवी व पुजारी ने बताया कि 26 व 27 को विशाल कुश्ती दंगल भी होगा। पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के ब्लाक अध्यक्ष ठाकुर लक्ष्मी नारायन ने बताया कि मेला के संबंध में चौमुहां विकास खंड के सभी परिषदीय स्कूलों का 26 नवंबर को अवकाश घोषित किया गया है।

विश्वास या अंधविश्वास
वैज्ञानिक चाहे भले ही अंधविश्वास मानें परंतु शरीर पर बने सफेद दागों और चर्म व कुष्ठ रोगों से मुक्ति पाने को यहां भीड़ लगी रहती है। लोगों का मानना है कि कुंड में सोमवार को स्नान कर स्वामी बाबा के दर्शन करने से कुष्ठ व चर्म रोगों से निजात मिलती है। चौमुहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्राभारी डॉ. एमके माथुर का कहना है कि कुंड के पानी व मिट्टी में कोई ऐसे रसायन हो सकते हैं जो त्वचा या शरीर पर हल्के सफेद दागों को मिटाने में मद्दगार साबित हो रहे हों, लेकिन सही वजह तो कुंड का पानी और मिट्टी चेक कराने के बाद ही पता लग सकती है। बाकी श्रद्धालुओं की अपनी आस्था है।

टिप्पणीs

  1. says

    Tarauli is a large village on Akbarpur-Shergarh road in Chhata Tehsil of Mathura. A very old temple of Swami Baba is famous and is regarded for its glory. White patches on skin get cured से applying holy mud of the Kund near the temple. Newly born children are shaved first time in the temple campus on every Monday, and the hair are offered to Swami Baba. A lakkhi mela (festival) is organized every year in the month of Kartik, which runs for 5 days. Lakhs of people gather in the mela and offer their prayer to Swami Baba and take holy bathe in the Kund.

    The simple approach to Tarauli is from Chhata via Shergarh or from Akbarpur on NH-2 (Delhi-Agra HW) towards Shergarh. One can also come to Tarauli from Nauhjheel via Shergarh.

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