भूमाफिया-अफसरगठजोड़ ने की गड़बड़

गोवर्धन: अधिकारियों की शह थी और दबंगई पर गुमान। आम एतराज की तो बात छोड़िये, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी राधाकुंड के अष्ट सखी कुंड की भूमि पर मकान बनते रहे। अफसरों और भूमाफियों की मिलीभगत ने पौराणिक राधा कुंड के अस्तित्व को संकट में डाल दिया। शासन-प्रशासन की अनदेखी से कुंड पानी को तरसता रहा और फायदा उठाकर भूमाफिया अपने मंसूबों में कामयाब हो गये।

राधाकुंड के बाशिंदों का कहना है कि कुंड की 9.41 एकड़ भूमि का बैनामा अवागढ़ के राजा सूर्यपाल सिंह से कराने के बाद उसमें कॉलोनी काट दी। सन 1980 में अष्ट सखीकुंड में प्लॉट कटने शुरू हुए थे। लोगों ने उसमें मकान बना लिये।

शिकायतों का सिलसिला

गोवर्धन: राधा कुंड निवासी महेन्द्र गोस्वामी पुत्र प्यारेलाल, चन्द्र विनोद कौशिक पुत्र विश्वनाथ व सुबलदास बाबा ने तत्कालीन जिलाधिकारी से कुंड पर हो रहे अवैध कब्जे की लिखित में शिकायत की। सन् 2000 में एमसी मेहता ने जनहित में अष्टसखी कुंड के लिए एक रिट दायर की। राधाकुंड के रामशरण बौहरे पुत्र पूनीलाल, राजेश पुत्र गोपाल ने भी सिविल कोर्ट में कुंड पर हो रहे अवैध कब्जे का मुकदमा डाला।

महेन्द्र गोस्वामी के अनुसार सन् 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने यथा स्थिति रखने के आदेश दिये। उस समय कॉलोनी में 72 मकान बने हुये थे। जिनकी संख्या आज करीब तीन सौ हो चुकी है।

बाबा सुबल दास ने की रिट

गोवर्धन: अष्टसखी कुंड में हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ बाबा सुबल दास, महेन्द्र गोस्वामी, दिनेश कौशिक और गजाधर ने एक याचिका मई 2012 में उच्च न्यायालय में दायर की।

याचिका में कुंड के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को सुरक्षित रखने की मांग की है। याचिका पर 9 अक्टूबर को न्यायालय ने कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्यवाही करने का आदेश कर दिया है।

जान से मारने की धमकी

उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले बाबा सुबल दास ने थाने में तहरीर दी है कि कुछ लोगों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है।

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