अष्टसखी कुंड से अतिक्रमण हटाने का निर्देश

इलाहाबाद : उच्च न्यायालय ने मथुरा अष्टसखी कुंड, राधा कुंड व श्याम कुंड का अतिक्रमण कर रिहायशी कालोनी बनाने के मामले में जिलाधिकारी की कार्रवाई रिपोर्ट को संतोषजनक नहीं माना है। अदालत ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रखने का निर्देश दिया और कहा कि अवैध निर्माण के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाए। न्यायालय ने याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 31 अक्टूबर नियत करते हुए जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की है।

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अमिताभ लाला तथा न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खण्डपीठ ने सुबलदास की जनहित याचिका पर दिया है। अदालत में भारत सरकार की तरफ से भी हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि भूमाफिया ने अष्टसखी कुंड पर अवैध कब्जा कर कालोनी बना ली है। कुंड का पुरातात्विक स्वरूप बिगाड़ दिया गया है। राज्य सरकार से इन स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में परिवर्तित करने को कहा गया है।

भारत सरकार की तरफ से सहायक सॉलीसिटर जनरल आरबी सिंहल व एसके राय ने पक्ष रखा। याची के अधिवक्ता एके मिश्र का कहना था कि सैकड़ों वर्ष पुराने तीनों तालाबों रकबा 9.81 एकड़ की जमीन पर अतिक्रमण करके रिहायशी कालोनी बना ली गयी है जिससे कुंड का स्वरूप नष्ट होता जा रहा है।

याचिका में 200 मकानों को हटाने सहित तालाबों की बहाली के साथ इनमें पानी भरने की मांग की गयी है। न्यायालय ने तालाब पर अवैध कब्जे को गंभीरता से लिया है और निर्माण हटाने का निर्देश दिया है।

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