रूठा मानसून सूखी नहरें

मथुरा: मानसून की देरी और बढ़े हुए तापमान के बीच सूखी पड़ी नहरें धान उत्पादक किसानों के सामने संकट खड़ा कर रही है। नर्सरियों में तेज गर्मी से पौधे झुलस रहे हैं। मौसम ने जल्द करवट नहीं बदली किसान मुसीबत में फंस जाएंगे।

धान उत्पादक किसानों को पहले ही मौसम की मार ङोलनी पड़ी थी। कई दिन तक तापमान के 45 से 46 डिग्री सेल्सियस रहने से नर्सरियों में 75 फीसद तक पौधे झुलस गए थे। किसानों को दूसरी बार नर्सरी डालनी पड़ी थी। अब रोपाई का वक्त आ गया है और परिस्थितियां अभी तक धान की रोपाई के अनुकूल नहीं हो सकी है। मानसून के भी देरी से आने की संभावनाएं मौसम विभाग जता रहा है। तापमान भी 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। नहरों में पानी नहीं है। गंगा से पिछले सप्ताह मांट ब्रांच को 1700 क्यूसेक पानी की मांग की गई थी। मांट ब्रांच के हैड देहरा पर औसतन 800 क्यूसिक पानी ही मिल पाया।

बालन पुर पहुंचते-पहुंचते 600 क्यूसेक रह गया। 300 क्यूसेक पानी सिंचाई विभाग के रिकार्ड के अनुसार हाथरस ब्रांच के खाते में चला गया। शेष पानी में से 150 क्यूसेक पानी आगरा-मथुरा की पेयजल सप्लाई के लिए हरनौल स्केप में छोड़ा जा रहा है। बचे पानी से मुरसान और सादाबाद राजवाह और उसकी माइनर ही चल पाई। सिंचाई विभाग के सूत्रों के मुताबिक जिले के किसी भी राजवाह के कुलाबे से बाहर पानी नहीं निकल पा रहा है। कमोवेश यही स्थित आगरा कैनाल की है, शेषाई डाउन पर 1000 क्यूसिक पानी मिल रहा है। आगरा कैनाल अपर और लोअर खंड के किसी भी राजवाह में पानी नहीं है।

झराब का पानी ही राजवाहों में चल पा रहा है।

पानी की कमी से नर्सरियों में पौधों को बचाने के लिए किसानों को कड़ी जद्दोजहद करनी पड़ी रही है। किसान प्रो. नवाब सिंह ने बताया कि नहरी पानी न मिलने से धान की नर्सरी को बचाना का मुश्किल पड़ रहा है। रोपाई का समय आ गया और अभी तक नहरों में पानी नहीं आया है। किसान ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि कारब राजवाहा में पानी न होने से किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं, जबकि नर्सरियों पौधे रोपाई के लिए तैयार है।

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