जीवंत हो उठा जमीन में दफन इतिहास

वृन्दावन में ब्रज फाउंडेशन संस्था की मेहनत रंग लाई तो सदियों से जमीन में दफन इतिहास जीवंत हो उठा। अब इस इतिहास के खुलने पर तत्कालीन भवन निर्माण कला ने इसकी खोज करने वालों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। जमीन से निकले रामताल की नींव के नीचे से लोहे की मोटी प्लेटें खुदाई में निकली हैं।

वृन्दावन में सुनरख से रामताल के नगला रोड पर ब्रज फाउंडेशन को प्राचीन ताल होने की जानकारी मिली। इस पर दिसम्बर 2011 में फाउंडेशन के चेयरमैन विनीत नारायण की पहल पर रामताल की खुदाई कर इतिहास को जिंदा करने के प्रयास शुरू किए गए। महीनों की खुदाई के बाद 120 फीट लम्बा और 180 फीट चौड़ा एक विशाल ताल निकला है। इस ताल की दीवालें चार फीट और छह इंच मोटी थीं। बाद में कुंड की नींव तक खुदाई की गई। इसमें जो निकल कर सामने आया, वह चौकाने वाला था। देश में पहला ऐसा कुंड मिला, जिसकी दीवालों के नीचे दो से तीन इंच मोटी लोहे की प्लेटें बिछी हुई मिलीं। ताल की खुदाई में लोहे की प्लेटें मिलने के बाद ब्रज फाउंडेशन ने इसकी सूचना पुरातत्व विभाग को दी। पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार दुबे ने कुंड का जायजा लिया। उन्होंने भी इस कुंड के अति प्राचीन होने की बात स्वीकारी। उनके मुताबिक यह संभवत: 1200 वर्ष पूर्व बना प्रतीत होता है। उन्होंने कुंड के नीचे बिछी लोहे की प्लेटों का नमूना लखनऊ भेजा है। उनके मुताबिक वहां इसके काल के बारे में पता लगाया जाएगा।

पानी मीठा करने को बनाया था कुंड

पुरातत्व अधिकारी के अनुसार, 1200 वर्ष पुराने इस कुंड को हर्ष के काल का माना जा सकता है। कुंड को आसपास का मीठा पानी करने के लिए तैयार किया गया था। इस कुंड का पानी कुंड के किनारे बने कुंओं के पानी को मीठा कर देता था।

कुंड में लगीं 12 इंच मोटी ईंटें

पुरातत्व अधिकारी के मुताबिक, इस कुंड में सवा बारह इंच लम्बी और सवा आठ इंच चौड़ी ईंटें लगाई गई हैं। कुंड के नीचे बिछी प्लेट संभवत: यहां की बालुई मिट्टी के धंसने की समस्या के कारण लगवाई गई होंगी। उनके मुताबिक देश के किसी अन्य क्षेत्र में ऐसी प्लेटें नही मिली हैं।

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