वृंदावन में राधे-राधे दुश्वार

वृन्दावन: राधे-राधे की मनमोहक धुन और सुर भले ही समूचे ब्रज क्षेत्र में धूम बचाएं लेकिन यहां की तंग गलियों इसे गुनगुनाना दुश्वार हो चला है।

पानी गांव, जयपुर मंदिर, कालीदह व रुक्मिणी विहार में थीं पार्किग


शासन ने वृंदावन में पार्किग पर करोड़ों रुपए खर्च किए। परंतु वे सुनसान पड़ी हैं और निजी पार्किग फलफूल रही हैं। श्रद्धालु अपनी गाड़ियों को मनचाही जगह खड़ी कर रहे हैं, जिससे आए दिन विभिन्न इलाकों में जाम की स्थिति बनी रहती है।

करोड़ों खर्च होने के बाद भी संचालन नहीं, सिटी बसें भी अधर में

कुछ साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने नगर विकास के लिए 300 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास किया था। इसमें प्रमुख रूप से नगर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए करोड़ों रुपये व्यय किए गए। जिससे पानी गांव मार्ग, जयपुर मंदिर के सामने तथा रुक्मिणी विहार और परिक्रमा मार्ग कालीदह से आगे आधुनिक सुख सुविधाओं से युक्त पार्किंग बनाई गई थीं। पार्किंग तो बनकर तैयार हो गयीं, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण उनका संचालन आज चार साल बाद भी नहीं हो पा रहा। वृन्दावन दर्शन को आने वाले हजारों की संख्या में श्रृद्धालुओं के वाहन नगर के अंदर तिराहा-चौराहा व जहां-तहां खड़े होते हैं। जिससे हर समय हर मार्ग पर जाम के हालात दिखते हैं।

अभियान में किया था उत्पीड़न

उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमण्डल के जिलाध्यक्ष ललित अरोड़ा का कहना है कि समग्र विकास योजना में श्रद्धालुओं को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सड़कों के चौड़ीकरण के नाम पर स्थानीय लोगों का उत्पीड़न किया गया।

दुकानों एवं मकानों को निशाना बनाया गया, परंतु जाम से निजात नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को चार पहिया वाहन पास सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही बाहर से आने वाले वाहनों को पार्किंग में कड़ाई के साथ रोका जाए।

टेम्पो हैं जाम का कारण

टैम्पो भी जाम लगाने में पीछे नहीं हैं। नगर की संकरी गलियों एवं बाजारों में बेखौफ घूमते टैम्पुओं पर न तो पुलिस और न ही प्रशासनिक अधिकारियों की कभी नजर आती है। नतीजतन आये दिन लोगों को जाम से जूझना पड़ता है।

कागजों में ही सिमटी यातायात व्यवस्था

समग्र विकास योजना के तहत नगर की यातायात व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी एन.जी. रविकुमार एवं मण्डलायुक्त अमृत अभिजात ने योजना बनाई थी। इसके तहत नगर में सिटी बसों का संचालन तय किया गया। योजना के अनुसार दिल्ली की ओर से आने वाले वाहनों को रुक्मिणी विहार पार्किंग में तथा मथुरा की ओर से आने वाले बड़े वाहनों को पानीगांव मार्ग स्थित पार्किंग में तथा छोटे वाहनों को जयपुर मंदिर के सामने स्थित पार्किंग में खड़ा कराने की योजना थी। फिर वहां से सिटी बस द्वारा श्रद्धालुओं को विद्यापीठ चौराहा एवं रंगजी मंदिर तक लाने ले-जाने का खाका तैयार किया गया था। योजना को अमल में लाने के लिए कई बार प्रशासन ने तारीख भी तय की, लेकिन दो वर्ष से भी अधिक समय बीतने के बाद भी योजना खटाई में है।

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